Month: May 2024

चुनावी राजनीति : मत विभाजन का रूकना 2024 में महत्वपूर्ण निर्णायक मुद्दा है!

भारतीय चुनाव सीधे-सीधे केवल अंक गणित की तरह नहीं होता है। भारतीय चुनाव में एक पक्षीय चुनाव परिणाम भी आते रहें हैं तो खण्डित जनादेश भी आये हैं। आजादी आन्दोलन के बाद स्वाधीनता मिलने पर शुरुआती दौर में भारतीय राजनीति…

चुनावी राजनीति असंभव संभावनाओं का अनोखा खेल है!

इन्दौर लोकसभा क्षेत्र में नोटा का सवाल 2024 की चुनावी राजनीति में सबसे बड़ा बवाल बन गया है! चुनाव पूर्व किसी भी मतदाता या चुनावी राजनैतिक विश्लेषक या व्याख्याकार के मन के किसी कोने में भी यह सवाल नहीं था…

Nakba Day: फ़िलिस्तीन–इज़राएली युद्ध अमेरिकी वर्चस्व के अंत की शुरूआत है

इंडो-फ़िलिस्तीन सॉलिडेरिटी नेटवर्क” द्वारा नकबा के 76 वें वर्ष पर कार्यक्रम का आयोजन रिपोर्ट : अदनान अली नईदिल्‍ली । सन् 1948 में फ़िलिस्तीनी ज़मीन पर इज़राएल राज्य की स्थापना के बाद फ़िलिस्तीनियों को उनके घर से बेघर कर दिया गया।…

डेंगू के जोखिम की न हो अनदेखी

डेंगू वैसे तो प्रतिवर्ष खासकर बारिश के मौसम में लोगों पर कहर बनकर टूटता है लेकिन कुछ राज्यों में इसके कारण महामारी जैसे हालात नजर आने लगे हैं और सैंकड़ों लोगों की मौत भी होती है। हालांकि डेंगू की दस्तक…

कौन देगा साफ हवा-पानी की ग्यारंटी !

मौजूदा आम चुनावों में सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी ओर से नागरिकों को थोक में तरह-तरह की ग्यारंटी दे रहे हैं, लेकिन किसी का ध्यान जीवन की बुनियादी जरूरत, हवा और पानी की ग्यारंटी की तरफ नहीं है। क्या इन दोनों…

आम चुनाव : मोदीजी ने क्यों पूछा कि क्या इंदौर में ज़्यादा वोटिंग नहीं होगी ?

राज्य में हुकूमत भाजपा की ही है फिर भी मोदीजी की पार्टी डरी हुई है ? डर का कारण इतना भर है कि चार जून को मोदी जी के सामने मुँह कैसे दिखाना है ! ‘बम कांड’ के कारण चर्चा…

क्या इन्दौर लोकसभा चुनाव में नोटा राजनैतिक प्रतिरोध का प्रतीक बनेगा?

भारत के आम चुनावों में भारतीय मतदाता को केवल अपना मनपसंद जनप्रतिनिधि निर्वाचित करने का ही अधिकार नहीं है भारत के प्रत्येक मतदाता को निर्वाचन में प्रत्याशियों को नापसंद करने का भी संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। भारतीय मतदाता की सामान्य…

लोकतंत्र एवं न्याय की अहम बुनियाद है प्रेस की स्वतंत्रता

विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (3 मई) प्रतिवर्ष 3 मई को ‘विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस’ मनाया जाता है। भारत में प्रेस को सदैव लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की संज्ञा दी जाती रही है क्योंकि लोकतंत्र की मजबूती में इसकी बेहद महत्वपूर्ण…

पोहे-कचोरी भूल जाइए! ‘स्वच्छ’ इंदौर को अब इस ‘शर्म’ के लिए याद रखिए!

श्रवण गर्ग लता मंगेशकर, कर्नल सी के नायडु,उस्ताद अमीर खाँ और एम एफ़ हुसैन जैसी हस्तियों के शहर इंदौर के कोई 25 लाख मतदाता हैरान-परेशान हैं कि अब 13 मई को उन्हें क्या करना चाहिए जिस दिन चौथे चरण का…

आम चुनाव : जनहित में जारी जन-घोषणापत्र

दुनिया के बाकी हिस्सों की तरह, भारत भी कई संकटों का सामना कर रहा है : सत्तावादी राजनीतिक ताकतों का उदय, धार्मिक व जातीय दमन और संघर्ष, पारिस्थितिकी की बदहाली, बेरोजगारी आदि। इस बीच भारत सरकार अपनी नीतियों और कार्यक्रमों की आलोचना करने वाले…