Year: 2022

रूस-यूक्रेन युद्ध के ग्यारह तथ्य

दो महीनों से ज्यादा समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध ने अब समूची दुनिया के सामने कुछ कठिन सवाल खडे कर दिए हैं। इस समय यह बहुत जरूरी है कि निष्पक्षता के आधार पर यूक्रेन युद्ध पर एक सुलझी हुई समझ…

समसामयिक स्थायी स्तम्भ

हमारा पैसा हमारा हिसाब नया एपिसोड : 34 लाख नौकरियां कहां गई, बेरोजगारी का संकट

एक तरफ बेरोजगारी दर कम हुई है, वहीँ रोजगार दर भी कम हो रही है। साथ ही सभी देशों में तेल की कीमतों में उछाल नए रिकॉर्ड बना रहा है। पेश है सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी टीम व्‍दारा तैयार ‘हमारा…

पं.संजीव अभ्यंकर : समूचे अंतरंग में सुवास की सम्मोहकता और रसिक मंडली की तन्मयता

विजय बहादुर सिंह भोपाल, 25 अप्रैल। भारत भवन की दूसरी साँझ मेवाती घराना के हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत फनकार पं.संजीव अभ्यंकर के गायन से खिल उठी। न केवल खिल उठी बल्कि समूचे अंतरंग में उसकी सुवास की सम्मोहकता ने ऐसा असर डाला कि समूची रसिक मंडली…

यात्रा : भुलाई जा रहीं ‘भारत-माता’

आजकल चहुंदिस फैले राष्ट्रवाद में भारत–माता को देखें तो क्या दिखाई देगा? क्या अपने आसपास का संसार वैसा ही खाता-अघाता, चमकदार है जैसा एक जमाने की फिल्मों में यदा-कदा दिखाया जाता था? या फिर हमारी भारत-माता के ऐसे भी असंख्य…

उत्तराखंड: रामगढ़ फलपट्टी के किसान गांधीवादी तरीके से आंदोलन के मूड में

अपने सीमित संसाधनों से अपनी खेती बागबानी बचाने वाले बहुत छोटे- छोटे किसान महिलाएं अपेक्षित सरकारी सहायता न मिलने और नीतिगत मामले में घोर लापरवाही के कारण नीति नियंताओं से बेहद नाराज़ हैं। उनका मानना है कि वे अपनी मांगों…

प्रधानमंत्री संग्रहालय : कैसी फूहड़ व खोखली आकांक्षा

दुनिया में कहीं किसी पद का कोई संग्रहालय बना हुआ है या नहीं। संग्रहालय विस्मृत प्रकृति-प्राणियों के होते हैं; बीते जमाने के वैभव के होते हैं; ऐतिहासिक घटनाओं के होते हैं या फिर उनके होते हैं जिनके ईर्द-गिर्द इतिहास आकार…

इन हिंसक भीड़ों पर नियंत्रण ज़रूरी हो गया है !

हमें भयभीत होना चाहिए कि अराजक भीड़ों के समूह अगर इसी तरह सड़कों पर प्रकट होकर आतंक मचाते रहे तो न सिर्फ़ क़ानून-व्यवस्था के लिए राष्ट्र्व्यापी संकट उत्पन्न हो जाएगा, उसमें शामिल होने वाले लोग धर्म और राष्ट्रवाद को ही…

श्रीलंका का आर्थिक संकट : उधारी में घी पीने का नतीजा

अपने हाथ से खुद की बदहाली करने का एक और उदाहरण हमारा पडौसी देश श्रीलंका है। वैसे तो पूंजी केन्द्रित मौजूदा आर्थिक ताने-बाने में कई देश, खासकर ‘तीसरी दुनिया’ कहे जाने वाले देश, लगातार बदहाली की गर्त में डूबते जा…

जलवायु परिवर्तन : खेती पर मंडराता खतरा

मौजूदा विकास के साथ जो संकट सर्वाधिक महसूस किया जा रहा है, वह है-जलवायु परिवर्तन का। जिस तौर-तरीके से हम अपना विकास करने में लगे हैं उससे धीरे-धीरे पहले प्रकृति, फिर वनस्पतियां और फिर खेती समाप्त होती जाएंगी। आम लोगों…

बागी आत्मसमर्पण स्वर्ण जयंती के मौके पर सप्रेस द्वारा चंबल घाटी में अहिंसा का अनूठा प्रयोग पुस्‍तक का प्रकाशन

इंदौर 16 अप्रैल । बागी समर्पण के स्वर्ण जयंती वर्ष के मौके पर ख्‍यातनाम फीचर सर्विस सर्वोदय प्रेस सर्विस ( सप्रेस) द्वारा पुस्तक चंबल घाटी में अहिंसा का अनूठा प्रयोग का प्रकाशन किया गया है। पुस्‍तक के माध्‍यम से करीब…