Year: 2020

डाकुओं से मुक्त चंबल-घाटी को पछाड़ रहे हैं, बीहड़

एक जमाने में दुर्दान्त डाकुओं की शरण-स्थली की तरह ख्यात चंबल-घाटी की सम्पन्नता में बरसों पुरानी बीहडों की समस्या आडे़ आती रही है। इससे निपटने के लिए हवाई जहाजों से बीजों के छिड़काव से लगाकर भूमि-समतलीकरण तक सभी तरह के…

क्या ‘रुपया’ भर कर प्रशांत भूषण ने ‘सोलह आने’ ठीक किया ?

क्या यह न्यायसंगत नहीं होगा कि प्रशांत भूषण द्वारा एक रुपए का जुर्माना भरकर मुक्त होने के मुद्दे को करोड़ों लोगों की ओर से जनहित के मामलों में सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने से तीन वर्षों के लिए वंचित हो…

लोकतंत्र के लिए ख़तरा बनता जा रहा है सोशल मीडिया ?

कोरोना ने नागरिकों की जीवन पद्धति में सरकारों की सेंधमारी के लिए अधिकृत रूप से दरवाज़े खोल दिए हैं और इस काम में सोशल मीडिया का दुनिया भर में ज़बरदस्त तरीक़े से उपयोग-दुरुपयोग किया जा रहा है। महामारी के इलाज…

उत्पादक के हाथ में उत्पादन के साधन देने से गरीबी दूर होगी

विनोबा भावे की 125 जयंती पर विनोबा विचार प्रवाह अंतर्राष्ट्रीय संगीति में सुश्री राधा बहन 30 अगस्त। विनोबा जी भूदान से अहिंसा को और अधिक आध्यात्मिक बनाया। वे उत्पादक को उत्पादन के साधन उसके हाथों मे देने की शुरुआत थी,…

‘कोरोना’ से ज्‍यादा खतरनाक है, लालची इंसान?

कोरोना वायरस से उपजी कोविड-19 बीमारी ने और कुछ किया, ना किया हो, इंसानों के सामने उसकी बनाई दुनिया की पोलपट्टी जरूर उजागर कर दी है। महामारी के दर्जे की इस विपदा ने बता दिया है कि हमारी दुनिया के दैनिक कारनामे…

सरकारी स्कूलों के बंद होने के मायने

बाजार-वाद के हल्‍ले में सरकारी अस्‍पतालों की तरह सरकारी स्‍कूलों को हम कितना भी गरिया लें, सर्वाधिक लोगों को स्‍वास्‍थ्‍य और शिक्षा की सुविधा इन्‍हीं की मार्फत मिलती है। तो फिर इन्‍हीं को बेहतर क्‍यों नहीं किया जाए? खासकर तब, जब कोविड-19 की ‘मेहरबानी’ से…

लेबनान : बारूद के ढेर से उगते इंकलाबी फूल

4 अगस्त को हुए विस्फोट के बाद से लेबनान की जनता एक तरफ अपने शहर को बनाने, खड़ा करने में जुटी है तो दूसरी तरफ वहाँ के सत्ता वर्ग को चुनौती दे रही है। आंदोलन को हिंसा और दमन भी…

भारत-अमेरिकी व्यापार समझौते से टूट सकती है, किसानों की कमर

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डॉनल्‍ड ट्रम्‍प की कुछ महीने पहले की भारत-यात्रा से परवान चढ़ी भारत-अमेरिकी के बीच खुले व्‍यापार समझौते की बातचीत, अब लगता है, अपनी मंजिल तक पहुंचने वाली है। लेकिन क्‍या यह समझौता भारत सरीखे तीसरी दुनिया के देश के हित…

सुब्बरावजी शिक्षक की तरह हैं, हम उनकी जीवनशैली देखकर कुछ सीख सकते हैं

डॉ. एस. एन. सुब्बराव पर केन्द्रित वेबीनार श्रृंखला में राजगोपाल पीवी मौजूदा दौर में कुछ लोगों में से भाई जी यानी डॉ. एस. एन. सुब्बराव एक हैं, जिन्होंने गांधीजी को देखा और उनके आंदोलन में भाग लिया। भाई जी ने…

ध्यान भीतरी संपदा को उजागर करने माध्यम है

विनोबा भावे की 125वीं जयंती पर विनोबा विचार प्रवाह अंतर्राष्ट्रीय संगीति में उषा बहन 28 अगस्त। मनुष्य जीवन में ध्यान और प्रार्थना जीवन के अभिन्न अंग होना चाहिए। व्यक्तिगत चेतना में परमात्म चेतना का आविर्भाव करना ध्यान है। ध्यान का…