लोहिया की विद्रोही चेतना अपने ढंग की अनोखी है। वह इतिहास की जरूरी बहसों को बढ़ाती है और व्यर्थ की बहसों को शांत करते हुए उसमें सामंजस्य बिठा देती है। डा. लोहिया अगर भगत सिंह और गांधी के बीच सेतु…
साठ के दशक में रिहंद बांध की नींव रखते हुए तब के राजनेताओं, खासकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू को इस पहल के नतीजों का कोई भान शायद ही रहा हो। देश की ऊर्जा राजधानी खडी करने के जुनून ने…
इन दिनों देशभर के किसान संसद द्वारा पारित तीन कानूनों को लेकर बेचैन हैं। इन कानूनों के विरोध में जगह-जगह धरना, प्रदर्शन जारी हैं और इनकी मार्फत सरकार से कहा जा रहा है कि वह इन कानूनों को वापस ले…
क्या दुबारा से एक नए विश्व मंच की कोशिश जरूरी है? क्योंकि जितने सवाल पहले थे वे आज भी हैं। जब दुनिया के आंदोलन मौजूदा हालात में अपनी राजनैतिक ज़मीन बचाने में लगे हैं, वैसे में एक अति ऊर्जा और…