Month: June 2020

जीवन, जीविका और जमीर : चीन को शिकार बनाकर निगल जाएगा

भारत-चीन सीमा विवाद और गलवन घाटी हिंसा राजेन्द्र सिंह चीन उन सभी मौका पर आगे आता है, जहां उसे दिखावटी नाम व प्रसिद्धि मिल सके और व्यवसाय में पैसा मिल सके। पैसा और प्रसिद्धि का भूखा चीन लेकिन अब दोनों…

संदेह के घेरे में नागरिकों का राष्ट्रप्रेम नहीं, नायकों का सत्ताप्रेम है !

चीन और पाकिस्तान के साथ अब तक हुई लड़ाइयों के अनुभव यही रहे हैं कि एक स्थिति के बाद नागरिक सरकार-आधारित स्रोतों को पूरी तरह से अविश्वसनीय मानने लगते हैं और सही सूचनाओं के लिए बाहरी स्रोतों पर ज़्यादा भरोसा…

लोकतंत्र में नागरिकत्व की प्राणप्रतिष्ठा

अनिल त्रिवेदी बहत्तर साल के लोकतंत्र में भारत के नागरिकों में लोकतांत्रिक नागरिक संस्कार और नागरिक दायित्वों की समझ और प्रतिबध्दता का स्वरूप कैसा हैं? इस सवाल का उत्तर ही तय करेगा भारत के नागरिक अपने जीवनकाल में नागरिक दायित्व…

आज भी अधूरे हैं, मार्टिन लूथर किंग के सपने

लल्जाशंकर हरदेनिया दुनिया के सर्वाधिक सम्‍पन्‍न और लोकतांत्रिक कहे जाने वाले देश अमरीका में वहां के अश्‍वेत नागरिकों के साथ जैसा व्‍यवहार हो रहा है, उसकी एक बानगी अभी डेढ हफ्ते पहले अमरीकी शहर मिनियोपोलिस में देखने को मिली। वहां…

हमें शर्मिंदा होने की क़तई ज़रूरत नहीं, सबकुछ ऐसे ही चलेगा

नई दिल्ली से कोई बारह हज़ार किलो मीटर दूर एक अश्वेत नागरिक की मौत पर अगर हम चिंतित होना चाहें तो भी कई कारणों से ऐसा नहीं कर पायेंगे। वह इसलिए कि तब हमें अपनी ही पुलिस व्यवस्था, उसके सांप्रदायिक…

विनम्रता, सज्जनता एवं दृढ़ता के संगम थे विट्ठल त्रिवेदी

सामाजिक, साहित्यिक और गांधी विचारक संस्‍थाओं ने दी श्रद्धांजलि   जाने माने शिक्षाविद, समाज सेवी एवं गांधी विचारक श्री विट्ठल त्रिवेदी का 14 जून 20 को इंदौर में निधन हो गया। वे कुछ समय से बीमार चल रहे थे। वे…

सत्यजीत रे : ‘जलसाघर-द म्यूजिक रूम’

कोठी बिल्कुल जर्जर अवस्था में पहुँच चुकी है। सामने खड़े होने पर लगता है कि अपने ही ऊपर गिर पड़ेगी। यहाँ मियाँ बशीरुद्दीन से भेंट होती है। बुजुर्ग हैं। शूटिंग के दिनों के गवाह हैं। कोई महीने भर चली थी।…

अब ‘एक देश, एक पार्टी‘ की ओर बढ़ते कदम ?

जनता को इस समय अपनी जान के मुक़ाबले ज़्यादा चिंता इस बात की भी है कि जैसे-जैसे लॉक डाउन ढीला हो रहा है और किराना सामान की दुकानें खुल रही हैं, सभी तरह के अपराधियों के दफ़्तर और उनके गोदामों…

अद्भुत फिल्मकार सत्यजीत रे का सिनेमाई संसार

दिनेश चौधरी दीगर चीजों के अलावा कोलकाता मुझे इसलिए भी अपनी ओर खींचता रहा कि यहाँ सत्यजीत रे रहा करते थे। कोलकाता अपने किस्म का अद्भुत शहर है और सत्यजीत रे अपने किस्म के अद्भुत फिल्मकार थे। किस्से- कहानियों की…

नीलम वर्मा : विरासत को सहेजने की मुहिम

संतोष कुमार द्विवेदी भारत में कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार हाथकरघा व हस्तशिल्प उद्योग उपलब्ध कराता है। आवश्यकता इसके संरक्षण के साथ ही साथ इसे मशीनी आतंक से मुक्त कराने की भी है। नीलम वर्मा अपने सीमित संसाधनों के सहारे…