Month: June 2020

‘कोविड-19’ के काम में सरकारी, गैर-सरकारी सुविधाएं

सुरभि अग्रवाल, शोभा शुक्ल, बॉबी रमाकांत व संदीप पाण्डेय कोरोना वायरस से उपजी ‘कोविड-19’ बीमारी ने बेहद छोटे, करीब तीन महीने के अंतराल में कई तरह के गुल खिलाए हैं। सरकारी लापरवाही, अक्षमता और टालू प्रवृत्ति उन कईयों में से…

वैक्सीन के निर्माण में जरूरी है आत्म-निर्भरता

‘कोविड-19’ के इलाज के लिए वैक्‍सीन यानि ‘टीका’ की अहमियत उजागर हुई है, लेकिन क्‍या विशाल पैमाने पर इसका निर्माण आसान होगा? वे कंपनियां जो धंधे की खातिर झूठे आंकडों से बीमारी की गंभीरता स्‍थापित करने से लगाकर खुद बीमारी…

‘उत्तम खेती, मध्यम बान : निकृष्ट चाकरी, भीख निदान’

कोरोना की चपेट में आए लाखों-लाख श्रमिकों की बदहवास गांव-वापसी इशारा कर रही है कि खेती में आज भी काफी संभावनाएं है। क्‍या यह बात हमारे नीति-नियंता, सत्‍ताधारी और नौकरशाह समझ पाएंगे? क्‍या ‘कोरोना-बाद’ का भारत वापस कृषि-प्रधान हो सकेगा?…

कोरोना संकट पर सामान्‍य ज्ञान

कोरोना वायरस ने इन दिनों दुनियाभर में खलबली मचा दी है। अमीर-गरीब, ऊंचा-नीचा, काला-गोरा, गरज कि हर नस्‍ल और फितरत के इंसान को कोरोना ने अपनी चपेट में ले लिया है। इससे कैसे निपटा जाए? यह सभी को बार-बार बताया…

क्या इंदिरा गांधी सचमुच में एक क्रूर तानाशाह थीं ?

आपातकाल लागू करना अगर देश में तानाशाही हुकूमत की शुरुआत थी तो क्या उसकी समाप्ति की घोषणा इंदिरा गांधी की उन प्रजातांत्रिक मूल्यों और परम्पराओं में वापसी नहीं थी जिनकी बुनियाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी ? अब हमें…

स्वयं की मुक्ति का उदघोष

हम राजनीतिक रूप से स्वतंत्र अवश्य हो गए हैं परंतु अभी भी मानसिक तौर पर उपनिवेशवाद की स्थिति से मुक्त नहीं हो पाए हैं। इस बीच कारपोरेटीकरण एवं वैश्वीकरण ने नए तरह के उपनिवेशवाद को हमारे ऊपर लाद दिया है।…

अरविन्द गुप्ता : जिसने बच्चों में उम्मीद के बीज बोए

शिक्षा के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए अरविन्द गुप्ता अपने तई प्रयासरत हैं। वे शिक्षक, इंजीनियर और वैज्ञानिक हैं। सबको पढ़वाने के लिए उनकी वेबसाइट लोकप्रिय है। वे बच्चों, शिक्षकों में उम्मीद जगाते हैं। उनमें उम्मीद के बीज बोते…

जमीन पैसे की नहीं, प्राण की चीज

आचार्य विनोबा मानव के लिए सबसे खतरनाक चीज अगर कोई है तो वह है, उसकी जमीन से उखड़ना। जैसे हर एक पेड़ का मूल जमीन में होता है, वैसे ही हर एक मनुष्य का संबंध जमीन के साथ होना चाहिए।…

बारहनाजा : पौष्टिकता और औषधीय गुणों से भरपूर

बारहनाजा शब्द आपको किसी शब्दकोश में ढूंढ़ने से नहीं मिलेगा। यह शब्द कृषि विज्ञानियों के मानस में भी नहीं है, किंतु पारंपरिक कृषि विज्ञान के पारखी उत्तराखंड के किसान इसे पीढ़ियों से जानते हैं और समझते हैं। बारहनाजा का शाब्दिक…