इंसानी गतिविधियों ने प्रकृति को इस कदर बेचैन कर दिया है कि अब खुद इंसान ही संकट का सामना कर रहा है। विकास की हड़बड़ी में लगातार बढ़ रहे जलवायु परिवर्तन ने इस बदहाली को और भी बढ़ा दिया है। पिछले साल की प्राकृतिक आपदाओं का लेखा-जोखा इसी की एक बानगी है।
21 वीं सदी के रजत जंयती वर्ष 2025 में देशभर में प्राकृतिक आपदाओं का प्रकोप रहा। भूकंप के साथ अति वर्षा (बादल फटना), बाढ़, भूस्खलन तथा ग्लेशियर व पहाड़ टूटने की आपदाएं आती रहीं। प्रमुख रूप से कुल 57 आपदायें आयीं जिनमें भूकंप की 21 तथा बाढ़, भूस्खलन की 36 रहीं। भूकंप से कोई जनहानि नहीं हुई, जबकि बाढ़, भूस्खलन की आपदाओं से मौतें एवं भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश में दोनों प्रकार की आपदाएं आयीं। जनवरी छोड़कर शेष सभी महीनों में देश के अलग-अलग स्थानों पर 2.8 से 5.8 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस किए गए। असम, बंगाल सहित पूर्वी उत्तर भारत में 14 सितम्बर को 5.8 तीव्रता का कम्पन हुआ। मणिपुर एवं अरूणाचल में भी हल्के झटके आए।
राजस्थान के बीकानेर तथा हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मनाली में दो-तीन फरवरी को 3.6 तीव्रता के झटके दर्ज किये गए। हिमाचल के मंडी में 23 फरवरी तथा चम्बा में 20 अगस्त को क्रमश: 3.7 तथा 4.3 तीव्रता का कम्पन हुआ। 31 अक्टूबर को शिमला में 2.8 तीव्रता के कुछ झटके आये। दिल्ली-एनसीआर में 17 फरवरी को 4.0 तीव्रता का कम्पन हुआ एवं इसी समय बिहार के कुछ हिस्सों में भी हल्के झटके आए। 21 सितम्बर को मेघालय में कुछ स्थानों पर कम्पन हुआ। केन्द्र शासित प्रदेश लेह-लद्दाख में 21 अक्टूबर को 3.7 तीव्रता के झटके दर्ज किये गए।
मध्यप्रदेश में सर्वाधिक छः बार भूकंप दर्ज किया गया। सिंगरोली में 17 फरवरी तथा 27 मार्च को 3.5 तथा 4.0 तीव्रता का कम्पन हुआ। बैतूल के मुलताई में तीन व 20 मई को हल्के (2.8 तीव्रता) झटके आये। अलीराजपुर तथा बडवानी में 4 मई को एवं खंडवा में 4 जून को 3.5 के झटके आये। खंडवा जिले के सेगांव, अहमदपुर एवं सुरगांव में 14 जून को 3.8 तीव्रता के झटके महसूस किए गए। रतलाम जिले में पिपलौदा के पास गांव मचून में 8 नवम्बर को हल्के 2.0 तीव्रता के झटके आये।
बादल फटने, बाढ़ तथा भूस्खलन की देश के ग्यारह राज्यों में 36 आपदाएं आयीं। इन आपदाओं से करीब 350 लोगों की मौतें हुईं तथा पशुधन एवं खेती-बाडी में भी भारी नुकसान हुआ। हिमाचल प्रदेश में 11 तथा जम्मू-कश्मीर एवं उतराखंड में 8 बार ऐसी आपदाएं आयीं। फरवरी में उतराखंड के चमोली जिले के माणा गांव के पास ग्लेशियर फटने से भूस्खलन हुआ एवं 57 मजदूर बर्फ में दब गए। बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) के बालू घाट में अक्टूबर में पहाड टूटने से पैदा मलबा एक यात्री बस पर गिरा एवं 15 यात्री मारे गए।
हिमाचल प्रदेश में मार्च से अक्टूबर तक आपदाएं आती रहीं। 30 मार्च को कुल्लू के धार्मिक स्थल मणिकर्ण में भूस्खलन से एक विशाल पेड़ गिरा जिसमें दबकर 6 मौतें हुईं। एक से चार जुलाई के मध्य शिमला, मंडी, कांगड़ा सहित प्रदेश के ग्यारह स्थानों पर बादल फटे, भूस्खलन हुए एवं भारी तबाही के साथ 73 मौतें हुईं। तेरह-चौदह अगस्त को लाहौल स्पीति, शिमला तथा कुल्लू सहित पांच स्थानों पर फिर बादल फटे एवं जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। शमारनी गांव में 5 सितम्बर को हुए भूस्खलन में पांच मौतें हुईं। एक सरकारी जानकारी के अनुसार राज्य में 20 जून को मानसून आने के बाद आयी आपदाओं से 2031 करोड़ रुपए की हानि तथा 240 मौतें हुईं।
उत्तराखंड में भी जून से सितंबर तक आपदाएं आती रहीं। 23 जून को बद्रीनाथ राजमार्ग तथा यमुनोत्री पैदल मार्ग पर हुए भूस्खलन से तीन लोग मारे गए। उतरकाशी जिले में 28 जून को बादल फटने से होटल में कार्यरत दो मजदूर मारे गए एवं सात लापता हुए। यमनोत्री राजमार्ग पर 10 मीटर का हिस्सा धंस गया जिससे चारधाम यात्रा रोकी गयी। 20 जुलाई को केदारनाथ व रूद्रप्रयाग सहित पूरा घाट में बादल फटने से भूस्खलन हुआ एवं कई गडि़यों पर मलबा गिरा। छह अगस्त को धराली, उतरकाशी तथा हर्षित में बादल फटे एवं सैलाब आया।
धराली में खीरगंगा नदी की बाढ़ से एक पूरा पहाड़ बह गया, चार लोग मारे गए, 52 लापता हुए। प्राचीन ‘कल्प केदार मंदिर’ भी ध्वस्त हो गया। लापता लोगों की खोज न होने पर दिसंबर में सरकार ने उन्हें मृत घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की। धराली में 23 अगस्त को आयी बाढ़ से पैदा मलबे में कई मकान व दुकान दब गए। 28 अगस्त को रूद्रप्रयाग, डूगरलोक, बडेश तथा देवाल में बादल फटने से आयी बाढ़ में 100 गांव बह गए एवं रूद्रप्रयाग का हनुमान मंदिर भी टूट गया। देहरादून के आसपास के क्षेत्रों में 16 सितंबर को बादल फटने से आयी बाढ़ में 15 मौतें हो गयीं। एक जानकारी के अनुसार राज्य में 2024 के मुकाबले वर्षा तो केवल 15 प्रतिशत ज्यादा हुई, परंतु तबाही दो गुना से ज्यादा हुई।
जम्मू-कश्मीर के रामबन में 20 अप्रैल को बादल फटने से आयी बाढ़ में तीन लोग मारे गये एवं 250 मकान ध्वस्त हो गए। तेज बारिश से अमरनाथ यात्रा भी 07 जुलाई को रोकी गयी। चौसिती गांव (किश्तवाड़ा) में 17 अगस्त को बादल फटने से आयी बाढ़ में 64 मौतें तथा 100 लोग लापता बताए गए। कढुआ, उधमपुर, किश्तवाड़ा तथा डोडा में 23 एवं 27 अगस्त को आए सैलाब में 07 मौतें हुईं एवं कई मकान, दुकानें टूटीं। वैष्णोदेवी मार्ग पर 27 अगस्त को आयी भारी बारिश से पैदा बाढ़, भूस्खलन में 34 लोग मारे गये। यहां 24 घंटे में 10 इंच वर्षा होने से 99 वर्ष का रिकार्ड टूटा एवं कई स्थानों पर भारी नुकसान हुआ। रामबन तथा रियासी जिले में 30 अगस्त के भूस्खलन से 11 मौतें हुईं। कमजोर भौगोलिक स्थिति के कारण रामवन प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में ज्यादा रहता है।
सिक्किम में 24, 25 अप्रैल को तेज बारिश व भूस्खलन से सैकड़ों पर्यटक फंसे। मगन जिले में 24 जून को आये भूस्खलन से तीन सैनिक मारे गए। बिहार के सात जिलों में 9 अप्रैल की तेज बारिश व बिजली गिरने से 19 मौतें हुईं। प. बंगाल के दार्जीलिंग में चार सितंबर को बारिश व भूस्खलन से 20 मौतें हुईं। अन्य जिलों में भी 24 घंटे में 10 इंच पानी गिरा। 29, 30 एवं 31 मई को मणिपुर, मिजोरम, असम, अरूणाचल प्रदेश व त्रिपुरा में बारिश, भूस्खलन से 24 मौतें एवं कुल 12 हजार लोग प्रभावित हुए। पंजाब के 13 जिलों के 1400 गांव 19, 20 अगस्त को हुई भारी बारिश से जलमग्न हो गये एवं 24 मौतें दर्ज की गयीं।
देश में मानसून इस वर्ष केवल वर्षा का मौसम नहीं रहा, अपितु जलवायु आपदाओं में से एक बताया गया। मई का महीना ज्यादा बारिश का रहा। ‘क्रिश्चियन एड’ संस्था की एक वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार इस वर्ष भारत एवं पाकिस्तान में मानसून की बारिश से पैदा बाढ़ व भूस्खलन आदि से लगभग छह अरब डालर का नुकसान हुआ एवं दो हजार लोग मारे गये। (सप्रेस)


