अपने जीने के लिए जरूरी पर्यावरण के साथ हम एक व्यक्ति, समाज और सत्ता की तरह जैसा क्रूर, आत्महंता व्यवहार कर रहे हैं, वह एक सीमा के बाद हमें खुद ही भोगना पडेगा। विकास के झांसे में की जा रही…