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Independence day 2025 : कुहासे में लोकतंत्र

आजादी के नतीजे में हमें जो सर्वाधिक काम की बात मिली है, वह है लोकतंत्र, लेकिन क्या हम उसे ठीक तरह से वापर रहे हैं? क्या आज, 78 साल बाद एक देश, एक समाज और एक राज्य की हैसियत से…

पर्यावरण के खतरों से निरंतर आगाह करने में मीडिया की भूमिका महत्‍वपूर्ण

बदनावर में पर्यावरण संगोष्ठी का आयोजन बदनावर, 25 जनवरी। पर्यावरण डाइजेस्ट मासिक पत्रिका के प्रकाशन के गौरवशाली 37 साल पूरे होने के अवसर पर बुधवार शाम यहां चंद्रलीला पैलेस में बदनावर नगर परिषद के सहयोग से पर्यावरण संगोष्ठी का आयोजन…

खेल में खनकती पूंजी

हाल में भारत में हुए वन-डे विश्वकप क्रिकेट के आयोजन ने एक तरफ दुनिया-जहान के खेल प्रेमियों में हलचल मचाई, तो दूसरी तरफ एक बार फिर उजागर कर दिया कि क्रिकेट असल में खेल की बजाए दिनोंदिन पूंजी काटने का…

गैर-बराबरी में गुम होती, डिजिटल तकनीक

अंतरिक्ष की सैर कराने और बिजली की कारें बनाने के धंधे में अव्वल माने गए दुनिया के नंबर एक पूंजीपति एलन मस्क ने हाल में ‘ट्विटर’ के प्रभावी शेयर खरीदकर उस पर अपना सिक्का जमा लिया है। जाहिर है, दुनियाभर…

जीवाश्म ईंधन से जुड़े फेसबुक विज्ञापनों पर हुआ $9.6 मिलियन का खर्च, 431 मिलियन बार लोगों ने देखा

इन्फ्लुएंसमैप एक लंदन स्थित थिंक टैंक है, जो ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन से संबंधित मुद्दों पर विश्लेषण प्रदान करता है, व्‍दारा हाल ही में किये एक ताज़ा शोध से पता चलता है कि फेसबुक पर जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) से…

Baxwaha: प्राकृतिक संसाधन की लूट और विरोध के बीच पिसता ग्रामीण समाज

बक्सवाहा (Baxwaha) में हीरा खनन की सरकारी कोशिशों और नागरिकों के विरोध पर तदर्थ कमेटी की रिपोर्ट मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में बक्सवाहा का नाम इन दिनों सरकार, कारपोरेट, सामाजिक संगठन और पर्यावरण प्रेमियों की जुबान पर है। वजह…

सोशल मीडिया – कल हो, न भी हो ?

भारत में जिस तरह का सरकार-नियंत्रित ‘नव-बाज़ारवाद’ आकार ले रहा है उसमें यह नामुमकिन नहीं कि सूचना के प्रसारण और उसकी प्राप्ति के सूत्र बाज़ार और सत्ता के संयुक्त नियंत्रण (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) में चले जाएँ और आम जनता को उसका…

खबरों में मनोरंजन

एन कोविड-19 के महामारी-काल में भीषण बेरोजगारी, भुखमरी और बीमारियों को सिरे से भुलाकर भारतीय मीडिया कंगना-रिया की चटखारेदार कहानी में रमा है। मानो देश के सामने अब कुल मिलाकर कंगना का टूटा दफ्तर और रिया की कथित नशे की…

लोकतंत्र के लिए ख़तरा बनता जा रहा है सोशल मीडिया ?

कोरोना ने नागरिकों की जीवन पद्धति में सरकारों की सेंधमारी के लिए अधिकृत रूप से दरवाज़े खोल दिए हैं और इस काम में सोशल मीडिया का दुनिया भर में ज़बरदस्त तरीक़े से उपयोग-दुरुपयोग किया जा रहा है। महामारी के इलाज…

Social Media -निजता में सेंध लगाती कंपनियां और सरकारें

लेखक जार्ज ऑरवेल ने अपने उपन्यास ‘1984’ में समाज पर नजर रखने की जिस तकनीक का जिक्र किया है, आज उससे कई गुना शक्तिशाली, प्रभावी और व्यापक तकनीक की मार्फत सत्ता और सेठ हमारे आम जीवन पर नियंत्रण करने की…