Sardar Sarovar

पूंजी के लिए पर्यटन : किसका लाभ, किसकी हानि?

विनाशकारी विकास की हवस में हमारे सत्ताधारियों ने उन छह गांवों को सिरे से भुला दिया है जिनकी जमीनों पर साठ के दशक में ‘सरदार सरोवर परियोजना’ बनाने वालों की बस्ती बसाई गई थी। आजकल उसी इलाके में ‘स्टैच्यू ऑफ…

मछुआरों की समस्याएँ न सुनी गईं तो होगा आंदोलन : श्रमिक मछुआरा संघ की चेतावनी

भोपाल में कल आयोजित होगा जलाशय मछुआरों का वार्षिक अधिवेशन भोपाल, 11 नवंबर। राज्य मत्स्य महासंघ द्वारा जलाशयों में कार्यरत प्राथमिक मछुआरा सहकारी समितियों के सदस्यों का वार्षिक अधिवेशन बुधवार को भोपाल में आयोजित किया जा रहा है। इस संदर्भ…

नर्मदा बचाओ आंदोलन : बांध विरोध के चालीस साल

वैसे बड़े बांधों का विरोध उन्हें ‘नए भारत के तीर्थ’ के तमगे से नवाजे जाने के बरसों पहले शुरु हो गया था, लेकिन आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मापदंडों पर बाकायदा समीक्षा करके उनको खारिज करने का सिलसिला अस्सी के…

. . .जब ‘सरदार सरोवर’ को ‘नवागाम बांध’ कहा जाता था !  

राजेन्द्र जोशी चार दशकों के ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की वर्षगांठ पर यह जानना बेहद रोचक हो सकता है आखिर इस लंबे संघर्ष कि शुरुआत कैसे हुई थी? कौन लोग थे जिन्हें पानी और उसके लिए बांधों की जरूरत के उस…

मध्‍यप्रदेश : बसनिया बांध की वापसी

कुछ साल पहले कृतिपय बांधों को निरस्त कर देने की मध्यप्रदेश सरकार की घोषणा ने नर्मदा घाटी के रहवासियों को राहत दी थी, लेकिन अब दी गई प्रशासनिक स्वीकृति ने उन्हें फिर चिंता में डाल दिया है। बड़े बांधों को…

नर्मदा : बे-पानी बड़वानी के पडौस में सूखती नर्मदा

‘सरदार सरोवर’ निर्माण के दौरान जो सब्जबाग दिखाए गए थे उनमें पेयजल, सिंचाई और निस्तार के लिए भरपूर पानी का वायदा अव्वल था। आज करीब छह दशक बाद इस वायदे की हकीकत क्या है? सदानीरा नर्मदा के लगभग किनारे पर…

बांध तो नहीं रुका, लेकिन क्या आंदोलन भी असफल रहा?

करीब चार दशकों के लंबे अनुभव में ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ को अपनी सफलता-असफलता के सवालों का सामना करते रहना पडा है। एक तरफ घाटी में प्रस्तावित बांध बनते रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ आंदोलन, अपनी स्थानीय, सीमित ताकत और प्रभाव…