हमारे मौजूदा आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक ताने-बाने में, खासकर पिछले दशक में, शिक्षा की जितनी मिट्टी-पलीत हुई है, वैसा सदियों में नहीं हुआ। जाहिर है, इस ‘कमाल’ में देश की सत्ता पर काबिज राजनीतिक जमात की खास भूमिका है। मामला…
नये साल की दहलीज पर खड़ा हमारा देश अपनी निराशा से निकले, सन्निपात की आवाजों को सुने-समझे तो नये साल में कोई नई संभावना पैदा हो सकती है। संभावना सिद्धि नहीं है। उसे सिद्धि तक पहुंचाने के लिए मानवीय पुरुषार्थ…