महात्मा गांधी की प्रिय बकरी की हैसियत जानना हो तो किसी भी आदिवासी समाज में चले जाइए। वहां बकरी न सिर्फ दुधारू जानवर, बल्कि लगभग बेंक का दर्जा रखती है। वक्त-बेवक्त जरूरत पड़ने पर बकरी बेचकर लोग अपना काम चला…
जिस खेती की बदौलत इंसान अपना पेट भरता और जिन्दा रहता है, उसी खेती को केवल पूंजी कमाने की तरकीब में तब्दील कर दिया जाए तो क्या होगा? आप चाहें तो इसके नतीजे अपने आसपास ही देख और महसूस कर…
बुवाई के मौसम में रासायनिक खाद की मारामारी खेती के एक सालाना कर्मकांड की तरह होने लगी है। इसके तहत कई जगहों पर मार-पीट, गोदामों की लूट और प्रतिबंधात्मक धाराओं का कडाई से उपयोग होता है। क्या इससे किसी तरह…
कृषि अर्थव्यवस्था के जानकार मानते हैं कि खेती को बरकरार रखने, विकसित करने और सबका पेट भरने की अधिकांश जिम्मेदारी छोटे और सीमांत किसान ही निभाते हैं। जहां 70% ग्रामीण परिवार अभी भी अपनी आय के प्राथमिक स्रोत के रूप…
मौजूदा कृषि कितनी जहरीली है और उसकी पैदावार के कितने खतरनाक प्रभाव हो रहे हैं, इसे जानने के लिए किसी रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं है। सवाल है, क्या हम अपने आसपास से लगाकर वैश्विक स्तर के अनुभवों से सीखकर…