जवाबदेही सुनिश्चित करने और हिंसाग्रस्त राज्य में शांति और न्याय की बहाली सुनिश्चित करने का अनुरोध 23 जुलाई, 2023। जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (NAPM) समेत देश भर के सैकड़ों आंदोलनों और संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हुए करीब 3,200 से…
नर्मदा के विशेष सम्मेलन में पर्यावरण विशेषज्ञों व जानकारों का मतंव्य बड़वानी 8 जून । नर्मदा घाटी : आज और कल की चुनौतियां विषय पर नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा बड़वानी में बुधवार (7 जून) को आयोजित विशेष सम्मेलन में नर्मदा…
जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम) का राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन बांद्राभान, 1 अप्रैल। जन आंदोलन के राष्ट्रीय समन्वय (NAPM) के बैनर तले बसेरा सभागार बांद्राभान (होशंगाबाद, नर्मदापुरम) मध्यप्रदेश में “नदियों को अविरल बहने दो, जल, जंगल, जमीन, विस्थापन, विकास,…
कम ही लोगों को मालूम होगा कि विस्थापन-पुनर्वास से लेकर विकास की अवधारण तक पर सवाल उठाने वाली बांध विरोध की ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ की लडाई सौ साल पुराने ‘मुलशी सत्याग्रह’ की विरासत का ही एक पडाव है। उस जमाने…
करीब आधी सदी में पूंजी और इंसानों के ढेरों संसाधन लगाकर पश्चिमी मध्यप्रदेश में ‘सरदार सरोवर जल-विद्युत परियोजना’ खडी तो कर ली गई है, गाहे-बगाहे उसके गुणगान भी किए जाते हैं, लेकिन उसकी चपेट में आई ढाई सौ गांवों की…
लंबे समय पर नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुडे धार जिले के वरिष्ठ साथी जामसिंह भाई का हाल ही में देहांत हो गया । जामसिंह भाई की जमीन नर्मदा बांध की डूब में आई। वे विस्थापितों के हक में लगातार संघर्षरत…
नर्मदा बचाओ आंदोलन : संघर्ष और रचना के 36 वर्ष नर्मदा बचाओ आंदोलन ने देश और दुनिया में वैकल्पिक विकास के मॉडल की ओर ध्यान आकृष्ट करने में सफलता पाई है । दुनिया के इतिहास में जमीनी स्तर पर विस्थापन…
इंदौर, 19 नवंबर । आज बड़वानी और धार जिले के नर्मदा घाटी के सैंकड़ों किसान, मजदूर नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर की अगुवाई में इंदौर पहुंचे और शिकायत निवारण प्राधिकरण के आफिस का घेराव किया। धरना स्थल पर…
बड़े बांधों के घोषित उद्देश्यों में जल-विद्युत और सिंचाई के बलावा बाढ़-नियंत्रण भी शामिल है, लेकिन देशभर में कहीं बांधों से बाढ़ को नियंत्रित करने का कोई ठोस उदाहरण सामने नहीं आया है। मध्यप्रदेश में जहां नर्मदा और उसकी सहायक…
पिछले तीन दशकों की बरसात में शायद ही कोई साल रहा हो जब ‘सरदार सरोवर’ प्रभावितों ने अपने जीने-मरने के कानूनी हकों के लिए संघर्ष न किया हो। पिछले साल आंदोलन की मुखिया मेधा पाटकर के आमरण अनशन के बाद…