Kisan Andolan

कैसे कारगर होगा, ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (MSP) ?

सालभर से ज्यादा के किसानों के दिल्ली धरने में, तीन कानूनों की वापसी के बाद जिस बात का अडंगा लगा है वह ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ यानि ‘एमएसपी’ है। इसे अमल में कैसे लाया जाएगा? किन तरीकों से ‘एमएसपी’ को कारगर…

‘एमएसपी’: कानून की कठिनाइयां

प्रधानमंत्री द्वारा कृषि संबंधी कानूनों के वापस लेने के बावजूद किसान अब भी दिल्ली घेरकर बैठे हैं तो उसकी वजह उनके अनेक बुनियादी मुद्दों के अब भी जहां-के-तहां लटके रहना है। इनमें से एक, सभी 23 फसलों पर कानूनी रूप…

किसान आंदोलन : कैसा हो, ‘एमएसपी’ कानून?

दिल्ली की सीमाओं पर कई महीनों से धरना देकर बैठे किसानों की दो कानूनों और एक कानून में संशोधन को वापस लेने के अलावा एक महत्वपूर्ण मांग सभी 23 फसलों पर ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ लागू करने का कानून बनाने की…

लोकतंत्र की सड़क बहुत लम्बी है ; सरकार की कीलें कम पड़ जाएँगी !

किसान ‘कांट्रेक्ट फ़ार्मिंग’ से लड़ रहे हैं और पत्रकार ‘कांट्रेक्ट जर्नलिज़्म’ से। व्यवस्था ने हाथियों पर तो क़ाबू पा लिया है पर वह चींटियों से डर रही है। ये पत्रकार अपना काम उस सोशल मीडिया की मदद से कर रहे…

किसान आंदोलन : अपने पाले में आंदोलन

‘गणतंत्र दिवस’ की 26 जनवरी पर पुलिस, प्रशासन और आंदोलनकारी किसानों के नेतृत्व के कतिपय हिस्से द्वारा अपनी-अपनी वजहों से की गईं गफलतों ने हिंसा और अराजकता का अप्रिय माहौल बना दिया था। लगने लगा था कि आजादी के बाद…

इस आंदोलन का “महात्मा गांधी” कौन है ?

छह महीने के राशन-पानी और चालित चोके-चक्की की तैयारी के साथ राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर पहुँचे किसान अपने धैर्य की पहली सरकारी परीक्षा में ही असफल हो गए हैं ,क्या ऐसा मान लिया जाए ? जाँचें अब उनके सत्तर…

2020 और 2021 के भोपाल का फर्क, उर्फ ठंड कुछ ज्यादा है इस बार !

किसान आंदोलन भोपाल में दो कदम आगे बढ़ा है। नीलम पार्क पर जहां प्रशासन ने बैठने भी नहीं दिया है, तो वहीं मंडी गेट पर दो दिन तक नारों और भाषणों का दौर जारी रहा। अब आगे भी सीमित ताकत,…

पत्रकार, पत्रकारिता और किसान आंदोलन

राजदीप अम्बानी-अदाणी को हो रहे नुक़सान की चर्चा करते हुए इस बात का ज़िक्र नहीं कर पाए कि किसी भी आंदोलन का इतना लम्बा चलना क्या यह संकेत नहीं देता कि सरकार के वास्तविक इरादों के प्रति किसानों का संदेह…

किसान आंदोलन : एक बार फिर बकासुर

वैसे देखा जाए तो बकासुर की यह कथा विज्ञान और तकनीक पर न्यौछावर विद्वानों से लेकर अहर्निश भक्तिभाव में डूबे धर्म-प्राणों तक सभी में कमोबेश मौजूद रहती है। सभी को लगता है कि संकट या समस्या का एकमात्र इलाज केवल…

किसानों को क्यों नहीं समझा पा रही, सरकार?

कडकती ठंड और तेज बरसात में देश की राजधानी को घेरे बैठे किसानों को अब करीब डेढ महीना हो गया है, लेकिन मामला सुलझता नजर नहीं आता। किसान तीन नए कृषि कानूनों को खारिज करवाना चाहते हैं और सरकार सात-आठ…