Khadi

गांधी दर्शन और विचार समाचार

स्वावलंबी खादी : अन्नपूर्णा से आत्मनिर्भरता की ओर — प्रो. उल्हास जाजू

अखिल भारतीय चरखा संघ के शताब्दी वर्ष पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय संवाद वर्धा, 16 अक्‍टूबर। अखिल भारतीय चरखा संघ के शताब्दी वर्ष (1925–2025) के उपलक्ष्य में खादी मिशन सेवा ट्रस्ट एवं मुदित शिक्षा संस्था, वर्धा के संयुक्त तत्वावधान में तीन…

खादी स्वतंत्रता व स्वावलंबन की प्रतीक है, राष्ट्र की आत्मनिर्भरता इसी पर टिकी है-  डॉ. संजय सिंह

भोपाल के गांधी भवन में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर विचार गोष्ठी का आयेाजन भोपाल, 8 अगस्‍त। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि के तौर पर बात रखते हुए केंद्रीय गांधी स्‍मारक निधि के मंत्री एवं गांधी भवन…

खादी विचार को टिकाने के लिए सरकारी तंत्र से मुक्ति आवश्यक: गौतम भाई

कुमारप्पापुरम में दो दिवसीय खादी सभा प्रारंभ वर्धा 22 फरवरी। खादी एक समग्र और पूरिपूर्ण विचार है। इसकी बुनियाद सत्य और अहिंसा है। खादी विचार को टिकाने के लिए सरकारी तंत्र से मुक्ति आवश्यक है। वास्तव में खादी बगावत का…

गांधी जयंती : महात्‍मा गांधी के रचनात्मक कार्य

महात्मा गांधी ने अपने विचारों के क्रियान्वयन के लिए अनेक संस्थाओं का निर्माण किया था। 48 में, उनके जाने के बाद सभी को मिलाकर दो प्रमुख संस्थाएं बनाई गईं, परन्तु आज इन संस्थाओं के क्या हाल हैं? क्या आज भी…

खस्ताहाल खादी : अस्तित्व की लड़ाई

खादी, जो हमारे स्वतंत्रता संग्राम का एक सर्वमान्य प्रतीक है, सरकारी नीतियों के चलते क्या अपने मूल स्वरूप में बच पाएगी? क्या सर्वग्राही बाजार और आधुनिक फैशन उसे भी धीरे-धीरे ‘सिन्थेटिक’ वस्त्रों की जमात में शामिल नहीं कर देंगे? बर्लिन…

खादी खड़ी बाजार में

आजादी के आंदोलन में जिस खादी को संघर्ष के एक कारगर औजार की हैसियत से नवाजा गया था, वह खादी आज बाजार में तरह-तरह के दबावों के चलते अपना अस्तित्व तक गंवा रही है। सवाल है, वस्त्र-स्वावलंबन की मार्फत आजादी…

समाचार

खादी संस्थाओं के ऋण माफ करने एवं दोनों देशों से युद्ध का रास्ता त्यागने का आव्‍हान

सर्व सेवा संघकी राष्ट्रीय कार्यकारिणी सम्पन्न सेवाग्राम :  सर्व सेवा संघ (अखिल भारत सर्वोदय मंडल) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी  की वर्चुअल बैठक में 13  राज्यों के 22 सदस्यों ने खादी संस्थाओं की ऋण माफ़ी एवं भारत और चीन के बीच में तनाव के संदर्भ…

जमीन पैसे की नहीं, प्राण की चीज

आचार्य विनोबा मानव के लिए सबसे खतरनाक चीज अगर कोई है तो वह है, उसकी जमीन से उखड़ना। जैसे हर एक पेड़ का मूल जमीन में होता है, वैसे ही हर एक मनुष्य का संबंध जमीन के साथ होना चाहिए।…