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अनेक धाराओं के सेतु थे, गणेश शंकर विद्यार्थी

हमारी आजादी के आंदोलन में अनेक जीवट की शख्शियतों ने हिस्सेदारी की थी। उनमें से एक थे – गणेश शंकर विद्यार्थी। हमारी पत्रकारिता की शुरुआत विद्यार्थी जी सरीखे निष्ठावान संपादकों से हुई थी, लेकिन वे आजादी के एक ऐसे सिपाही…

भूदान आंदोलन के बाद अब भू-मुक्ति

पचास के दशक में विनोबा भावे की अगुआई में शुरु हुआ ‘भूदान आंदोलन’ अब किस परिस्थिति में है? क्या उसने अपने घोषित उद्देश्यों में कुछ हासिल किया है? आज भूमि वितरण के इस महायज्ञ में क्या जोडा जा सकता है?…

स्‍वागत : नये साल 2024 की दहलीज पर

नये साल की दहलीज पर खड़ा हमारा देश अपनी निराशा से निकले, सन्निपात की आवाजों को सुने-समझे तो नये साल में कोई नई संभावना पैदा हो सकती है। संभावना सिद्धि नहीं है। उसे सिद्धि तक पहुंचाने के लिए मानवीय पुरुषार्थ…

76वें स्वतंत्रता दिवस पर विशेष : छोटे राज्यों का लोकतंत्र

लोकतंत्र में विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका की बार-बार उजागर होती नाकामियों की एक वजह उनका मौके पर मौजूद ना रहना भी है जिसकी एक वजह प्रशासनिक इकाइयों का विशाल आाकार है। तो क्या अपेक्षाकृत छोटे राज्य ज्यादा कारगर हो सकते…