Farming

कृषि संसार वन्‍य जीव एवं जैव विविधता

नीलगाय और जंगली सुअर : खेती और नीति की समस्या

नीलगायों और जंगली सुअरों का फसलों को चौपट करने के लिए खेतों में उतरना एक तरह से कथित ‘वैज्ञानिक वानिकी’ का ही नतीजा है। कई इलाकों में वन्यप्राणियों के वन-निवासियों से घातक द्वंद्व भी इसी पद्धति से उपजे हैं। इनसे…

उत्तराखंड : खुद के भरोसे की खेती

अपनी समझ और संसाधनों की उपलब्धता के चलते किसान कई बार खेती की ऐसी पद्धति वापरते हैं जिससे एक तरफ तो पर्यावरण का संरक्षण होता है और दूसरी तरफ, जीवन जीने लायक उपज मिल जाती है। हिमालय के सुदूर ग्रामीण…

परमार्थ : गांव में टिकाऊ आजीविका

थोडी समझदारी और सहयोग से काम किया जाए तो खेती आज भी रोजगार का बेहतरीन जरिया बन सकती है। उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में सक्रिय स्वयंसेवी संस्था ‘परमार्थ’ ने इसी का प्रयास किया है। सोना सहरिया एक आदिवासी महिला है…

प्राकृतिक खेती : हिम्मत बंधाता हमीरपुर

विकास के शहरी ताम-झाम से थोडा भी बाहर निकलें तो हमें अपने लिए कारगर, उपयुक्त और लाभदायक विकास की बानगियां दिखाई देने लगती हैं। उत्तरप्रदेश के हमीरपुर जिले का यह इलाका इसी बात की तस्दीक करता है। संतोष एक ऐसा…

झारखंड : खनिज की खातिर खत्म होती खेती

किसानों, आदिवासियों और खेती से जुडे अनेक लोगों के लिए आजकल विकास का मतलब उनके प्राकृतिक संसाधनों, खासकर जमीन की लूट हो गया है। आदिवासी राज्य झारखंड भी इससे अछूता नहीं है। झारखंड के एक इलाके में जमीन की मारामार…

आधुनिक खेती के खतरे

आंकडे और अध्ययन बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन का सर्वाधिक असर खेती पर पड रहा है। नतीजे में उत्पादन, बीज, मिट्टी, पानी, यहां तक कि भूख, सभी संकट में फंसते जा रहे हैं। क्या इससे पार पाने का कोई तरीका…