गहन-गंभीर, समझने में दुरूह और कई बार उबाऊ तक माना जाने वाला हमारा संविधान यदि करके देखा जाए तो कैसा होगा? भोपाल की ‘यंगशाला’ से जुडे कुछ युवाओं ने संविधान के विभिन्न आयामों को निश्चित समय के लिए अपने-अपने जीवन…
इन दिनों हम एक देश की हैसियत से खुद के युवा होने का बडा जश्न मनाते रहते हैं, लेकिन क्या हमने कभी यह भी सोचा है कि पचास साल बाद यही आबादी बूढी भी होगी और तब देश की इसी…