Dream City

प्रकृति का पर्यावरण

पर्यावरण का जो संकट अब ठेठ हमारी देहरी तक पहुंच गया है और जिसे लेकर सालाना कर्मकांड की तरह कई दिवस भी मना लेते हैं, क्या वह हमारे ही जीवन-यापन के धतकरमों का नतीजा नहीं है? मसलन, दिनों-दिन बढ़ता-फैलता कचरे…