Dalit Rights

ज्योतिबा फुले की प्रासंगिकता : एक समकालीन विश्लेषण

उन्नीसवीं शताब्दी के सामाजिक अंधकार में जाति, लिंग और शिक्षा के प्रश्नों पर सबसे तेज स्वर उठाने वालों में महात्मा ज्योतिराव फुले का नाम अग्रणी है। रूढ़ियों और अन्याय के विरुद्ध उनके जमीनी संघर्ष ने भारतीय समाज में परिवर्तन की…

डॉ. आंबेडकर बनाम बी.एन. राव विवाद : संवैधानिक इतिहास पर राजनीति से समाज में अशांति

मध्य प्रदेश में संविधान निर्माता को लेकर चल रहा विवाद दलित–सवर्ण तनाव बढ़ा रहा है। कुछ वकीलों की टिप्पणियों ने डॉ. आंबेडकर के योगदान पर सवाल उठाते हुए व्यापक विरोध और प्रदर्शन भड़का दिए हैं। इतिहास व संवैधानिक प्रक्रिया को…