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नर्मदा के नातेदार !

‘‘आप नर्मदा को चाहने वाले हैं, और मैं भी नर्मदा को चाहने वाला हूँ। इसलिए हम भाई-भाई हैं।’’ यह कहने वाले लंबी सफे़द दाढ़ी, शैव तपस्वियों का केसरिया बाना पहने एक संन्यासी थे। यह वर्ष 1943 का साल था। नर्मदा नदी के उद्गम और…

वन्‍य जीवन : जंगलराज में सभ्यता

पढे-लिखे आधुनिक समाज में जंगल को बर्बरता, असभ्यता और पिछडेपन का ऐसा प्रतीक माना जाता है जिसमें ‘सर्वाइवल ऑफ दि फिटेस्ट’ यानि ‘सक्षम की सत्ता’ ही एकमात्र जीवन-मंत्र है, लेकिन क्या सचमुच ऐसा ही है? जंगल को जानने-समझने वाले इसके…