सामाजिक

पूंजी के निर्माण में वितरण की अहमियत

अकूत पूंजी के सतत निर्माण को विकास मानने वाली मौजूदा अवधारणा में उसके न्यायपूर्ण वितरण और जरूरत-भर खर्च का कोई स्थान नहीं है। एक तरफ ‘दिन दूनी, रात चौगुनी’ बढती पूंजी और दूसरी तरफ, कुछ लोगों के हाथ में उसका…

सद्भावना के लिए ‘सर्व धर्म समभाव’

महात्मा गांधी ने आजाद भारत के लिए कई तरह की योजनाओं, कार्यक्रमों और नीतियों की कल्पना की थीं, लेकिन दुर्भाग्य से वे आजादी के साढे पांच महीनों में ही हम से सदा के लिए विदा हो गए। बाद में उनके…