डॉ. एस.एन.सुब्बराव

डॉ. एस.एन.सुब्बराव : जिन्‍होंने जीवन में थकना और रुकना सीखा ही नहीं

बहुत सीमित संसाधनों में भी जीवन निर्वाह हो सकता है, यह भाई जी से सीखा जा सकता है। दो खादी के झोलों में दो जोड़ कपड़े, एक टाइपराइटर, डायरी, कुछ किताबें, कागज और पोस्टकार्ड यही उनका घर था। हमेशा हाफ…