जनता के स्वास्थ्य की अनदेखी करता अन्तरिम बजट; स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में आवंटन एक छलावा

पिछले वर्ष की तुलना में इस बजट में मात्र 1.69% रुपए का अधिक आवंटन

इंदौर, 2 फरवरी। जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियान मध्‍यप्रदेश ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतरमन द्वारा पेश किये गए अन्तरिम बजट को गरीब, महिला, युवा और किसान पर केन्द्रित बजट रहा है लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कोई खास प्रावधान नहीं किये गये है। अन्तरिम बजट में 87656.90 करोड़ का आवंटन किया गया है जो कि वर्ष 2023-24 के बजट अनुमान की तुलना में 86175 करोड़ रुपए याने मात्र 1.69% अधिक है। जबकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अन्तरिम बजट वर्ष 2023-24 के संशोधित बजट से मात्र 1.31% की नाममाऋ की बढ़ोतरी की गई है। वास्तव में यह बढ़ोतरी नहीं है क्योंकि मुद्रा स्फीति और महंगाई दर समायोजित करें तो यह बढ़ोतरी नकारात्मक होगी।

जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियान मध्‍यप्रदेश से जुडे एस. आर. आजाद, राकेश चांदौरे, अमूल्य निधि ने कहा कि आशा कार्यकर्ताओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को आयुष्मान भारत योजना में शामिल करने की घोषणा कर उनको लुभाने की कोशिश की है, परंतु वास्तव में इनमें से अधिकांश कार्यकर्ता अपनी सामाजिक- आर्थिक स्थिति के चलते पहले से ही इसके लिए पात्र थे। हालांकि आशा और आंगनवाड़ी कायकर्ताओं की मुख्य मांग सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके नियमितीकरण की थी, जिसकी कोई बात इस बजट में नहीं की गई है।

आयुष्मान भारत योजना में 10.30% की बढ़ोतरी कर निजीकरण नीति को बढ़ावा

जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियान मध्‍यप्रदेश ने कहा कि इस बजट में आयुष्मान भारत योजना के लिए लगभग 10.30% की बढ़ोतरी के साथ 7500 करोड़ का प्रावधान कर स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण की नीति को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने पर ज़ोर दिया है। आयुष्मान भारत योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर हुआ है, जो कि CAG रिपोर्ट से साबित होती है, फिर भी देश की जनता को बीमा आधारित सेवाएँ लेने के मजबूर किया जा रहा है।

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सरकार ने किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर का टीका लगाने की बात की है, उक्त मसला माननीय सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं, इसलिए इसके क्रियान्वयन पर संशय है। वहीं देश में चिकित्सा शिक्षा को मजबूती देने के लिए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए मात्र कमेटी बनाने की घोषणा की गई है।

बच्चों में पोषण की स्थिति सुधारने में डेढ़ प्रतिशत की कटौती

प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अन्तरिम बजट में बच्चों में पोषण की स्थिति सुधारने और बच्‍चों के विकास व देखभाल के लिए सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 योजना को प्रसारित करने की घोषणा की गई है परंतु बजट आवंटन में कटौती की गई है। इस योजना के तहत वर्ष 2023-24 के संशोधित बजट अनुमान के अनुसार 21523.13 करोड़ का प्रावधान था, परंतु सीधे 1.5% की कटौती कर 21200 करोड़ का आवंटन किया गया है।    कुल मिलाकर वर्तमान सरकार का यह बजट स्वास्थ्य सेवाओं में निजीकरण को प्राथमिकता देता दिखाई देता है।

बीमा आधारित योजना से स्वास्थ्य सेवाओं में निजीकरण को बढ़ावा

स्‍वास्‍थ्‍य मुद्दों पर कार्यरत एस आर आजाद एवं अमूल्‍य निधि ने कहा कि केंद्र सरकार का फोकस स्वास्थ्य सेवाओं को निजी हाथों को सौंप कर बीमा आधारित आयुष्मान भारत योजना के जरिए चुनिंदा लोगों को स्वास्थ्य सेवा का लाभ देना चाहती हैं जबकि यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की जगह यूनिवर्सल हेल्थ केयर और स्वास्थ्य सेवा सभी के लिए सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के जरिए पहुंचाया जाना चाहिए। उन्‍होंने मांग की है कि जीडीपी का 5 प्रतिशत स्वास्थ्य में खर्चा करना चाहिए और पीपीपी मॉडल और ठेका आधारित सेवा को खत्म कर ढांचागत सुधार कर सरकारी सेवा को मजबूत कर सभी को स्वास्थ्य सेवा मिले और स्वास्थ्य का अधिकार  कानून बनाने की जरूरत हैं।

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सरकार सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करें

इस बजट से जनता की उम्मीद है यह बजट सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने वाला हो और सरकार से हमारी मांग होगी कि स्वास्थ्य सेवाओं में सभी प्रकार के निजीकरण को बंद करे और बीमा आधारित सेवाओं के स्थान पर हमारे सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों को मजबूत करे और वहाँ पर स्वास्थ्य केंद्र के अनुरूप सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हो।

जन स्‍वास्‍थ्‍य अभियान मध्‍यप्रदेश ने सरकार से मांग है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सभी प्रकार से निजी सार्वजनिक भागीदारी को बंद किया जाए और स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं उनमें विभिन्न प्रकार की जाँचे, ऑपरेशन, सप्लाई आदि सार्वजनिक संस्थान के माध्‍यम से हो। सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों और सेवाओं को मजबूत करने के लिए बजट आवंटन में पर्याप्त वृद्धि की जाए और यह वृद्धि सकल घरेलू उत्पाद के कम से कम 5% तक लाने की दिशा में वृद्धि हो।

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