एम्स ऋषिकेश में भर्ती पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा की हालत स्थिर ; ऑक्सीजन सपोर्ट जारी

एम्स ऋषिकेश में भर्ती कोविड उपचाररत पर्यावरणविद् एवं चिपको आंदोलन के प्रणेता सुन्दरलाल बहुगुणा की हालत स्थिर बनी हुई है। उनका आक्‍सीजन लेबल 96 प्रतिशत है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, एम्स ऋषिकेश के कोविड वार्ड में भर्ती पर्यावरणविद् सुन्दरलाल बहुगुणा का स्वास्थ्य स्थिर बना हुआ है। उन्हें बीती 8 मई को एम्स अस्पताल में भर्ती किया गया था। उनके स्वास्थ्य संबंधी जानकारी देते हुए संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल ने बताया कि सांस लेने में आ रही परेशानी के मद्देनजर श्री बहुगुणाजी को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है।

उन्होंने बताया कि बीते रोज उनके स्‍वास्‍थ्‍य में आई गिरावट के कारण उनकी किडनी प्रोफाइल टेस्ट को पुन: किया जा रहा है और एम्‍स के चिकित्सकों का दल उनके स्‍वास्‍थ्‍य-स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

श्री बहुगुणाजी के सुपुत्र राजीव नयन बहुगुणा ने जानकारी है दी कि इस राष्ट्रव्यापी हाहाकारी के दौर में सैंकडों मित्रों, शुभेच्छुकों ने एम्‍स ऋषिकेश में भर्ती पिताश्री सुंदरलाल बहुगुणा के लिए फिक्रमंदगी जाहिर कर शीघ्र स्‍वास्‍थ्‍य की कामना की है। सोशल मीडिया और फोन पर अनेक शुभमानाएं प्राप्‍त हो रही है। वे अस्‍पताल में भरपूर आहार ले रहे हैं तथा सचेत हैं। वे बिस्‍तर पर लेटे – लेटे ही अपनी चर्या के अनुसार उंगलियों पर सर्वधर्म प्रार्थना करते हैं।

See also  आयुर्वेद में आस्था संकट का हल क्या है ?

Table of Contents

सागर से अंतरिक्ष तक : रक्षा विमर्श को नई दिशा देती शोधपरक कृति

भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और वैश्विक प्रतिष्ठा से जुड़ा रक्षा विमर्श केवल सैन्य शक्ति का वर्णन नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामरिक चेतना का दर्पण होता है। ऐसे समय में वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार गोयल की पुस्तक ‘सागर से अंतरिक्ष तक:

Read More »

अपने जैसा ‘एआई’

‘आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस’ उर्फ ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ के कसीदे बांचते हुए हम अक्सर इस मामूली सी बात को भूल जाते हैं कि ‘एआई’ आखिरकार एक व्यक्ति और समाज की तरह हमारा ही प्रतिरूप है। यानि हम उस मशीन में जैसा और जितना

Read More »

मध्यप्रदेश का बजट : ग्रीन फ्रेमवर्क का दावा, जलवायु संकट की अनदेखी

हाल के मध्यप्रदेश के बजट में तरह-तरह की लोक-लुभावन घोषणाओं के बावजूद पर्यावरण-प्रदूषण से निपटने की कोई तजबीज जाहिर नहीं हुई है। यहां तक कि पर्यावरण के लिए आवंटित राशि भी पिछले साल के मुकाबले घटा दी गई है। आखिर

Read More »