समसामयिक

राष्ट्रीय खेल दिवस : सेहत बनाने का सीधा, सरल रास्ता

खेलकूद में बच्चों की एक स्वाभाविक रूचि होती है| वे हर समय खेलना चाहते हैं, पर अपने अनुभवों से दबे-पिसे वयस्क उनको पढ़ाई-लिखाई पर अधिक ध्यान देने और खेलकूद पर समय बर्बाद न करने की हिदायतें देते नहीं थकते| पीढ़ियों…

मानसून में मजे के साथ संकट

देश में 60-62 फीसदी सिंचाई के लिए जिम्मेदार मानसून बहुत आनंददायी होता है। उत्सव के दर्जे का ऐसा मानसून अपने साथ कई ऐसी आपदाएं भी लाता है जिनसे निपट पाना अक्सर कठिन होता है। मानसून एक तरफ जहां आनंद, उल्लास और…

आजादी का अमृत महोत्‍सव : स्वतंत्रता आंदोलन में होलकर कॉलेज का योगदान

आजादी के स्वतन्त्रता आंदोलन में कई ऐसे गुमनाम युवा विद्यार्थी हैं जो अपने सीमित साधनों में भी पूरी निष्ठा और समर्पण से अपने सुख, सपनों और पढ़ाई की आहुति देकर स्वतंत्रता के यज्ञ की पवित्र अग्नि को प्रज्वलित करते रहे।…

आज़ादी के 75 साल पूरे होने पर 75 यात्रियों वाली आग़ाज़ ए दोस्ती यात्रा दिल्ली से वाघा बार्डर के लिए प्रस्‍थान

नईदिल्‍ली, 12 अगस्‍त। देश भर के विभिन्न क्षेत्रों से जुटे 75 यात्री आग़ाज़ ए दोस्ती यात्रा की शुरुआत दिल्ली से वाघा सीमा के लिए करने के लिए दिल्ली में एकजुट हुए और इस यात्रा के शांति यात्रियों को दिल्ली से…

सर्वोच्च न्यायालय में चुनाव में मुफ्त घोषणाओं के मुद्दे पर दिलचस्प बहस

श्रीलंकाई अर्थव्यवस्था के पतन की हालिया खबरों ने भारत के राज्यों की भूमिका पर एक नई बहस को जन्म दिया है। श्रीलंका की सरकार ने सभी के लिये करों में कटौती और विभिन्न मुफ्त वस्तुओं एवं सेवाओं के वितरण जैसे…

आत्महत्या : सजा का प्रावधान न्यायोचित नहीं

जीने के अधिकार में माननीय गरिमा के साथ जीना सम्मिलित है। जब तक व्यक्ति के जीवन का समापन प्राकृतिक रूप से नहीं होता है तब तक यह अधिकार यथावत रहेगा। भारतीय कानून आत्महत्या को अपराध मानता है तथा वह कुछ…

आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस : इंसान से आगे मशीन

अंग्रेजी के विज्ञान- उपन्यासकार एचजी वेल्स,आइजक आसीमोव आदि की काल्पनिक कथाओं के बाद पचास के दशक में जार्ज ऑरवेल ने अपने उपन्यास ‘1984’ की मार्फत बताया था इंसानों पर यदि मशीनें राज करने लगेंगी तो क्या होगा। अब लगता है,…

बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए जरूरी है, विकेन्द्रीकरण

हाल के ‘कोविड-19’ ने एक बार फिर उजागर कर दिया है कि हमारी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं बेहद लचर हैं। क्या है, जिसके चलते हम सस्ती, सर्वसुलभ और सेवाभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर नहीं कर पाते? एक कारण है, सरकारी…

सद्भावना के लिए ‘सर्व धर्म समभाव’

महात्मा गांधी ने आजाद भारत के लिए कई तरह की योजनाओं, कार्यक्रमों और नीतियों की कल्पना की थीं, लेकिन दुर्भाग्य से वे आजादी के साढे पांच महीनों में ही हम से सदा के लिए विदा हो गए। बाद में उनके…

‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ : हिंदी का बोलबाला

लंबे कूटनीतिक प्रयासों के बाद हाल में हिंदी, उर्दू और बांग्ला भाषाओं को ‘संयुक्त राष्ट्र संघ’ में मान्यता मिल गई है। दक्षिण एशिया की इन तीनों भाषाओं को बोलने वाली विशाल आबादी दुनियाभर में फैली है और अब समय आ…