Sarvodaya Press Service

सर्वोदय प्रेस सर्विस – फीचर्स सेवा के छ: दशक

समसामयिक

झूठे साबित हुए किसानों की आय दोगुना करने और खेती को लाभ का धंधा बनाने के दावे

हजारों किसानों द्वारा की जाएगी दिल्ली में गर्जना, सरकार के खिलाफ गहरा आक्रोश डॉ. सन्तोष पाटीदार भारतीय किसान संघ प्रदेश के बाद अब केंद्र सरकार की कृषि नीतियों के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने जा रहा है। इस विरोध प्रदर्शन…

‘आजादी के अमृत महोत्सव’ में उपेक्षित पर्यावरण

कोई देश हो, संगठन हो या कोई व्यक्ति, सभी को अपनी-अपनी वर्षगांठ उत्सव-उत्साह के अलावा अपने किए-धरे और मौजूदा हालातों की समीक्षा के साथ मनाना चाहिए। इस लिहाज से हम अपने देश की आजादी के 75 सालों का लेखा-जोखा करें…

बैंकों की बदहाली और निजीकरण का खतरा

किसी भी देश की आर्थिक सेहत में बैंकों की भूमिका अहम होती है,लेकिन आजकल तीसरी दुनिया, खासकर भारत सरीखे देशों में बैंकों को आम जनता को लूटने की नायाब तरकीब की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। नतीजे में समूचा…

गैस पीड़ितों के विशिष्ट इलाज में विफल भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसन्धान केंद्र (BMHRC)

एक दशक पहले तक जिस भोपाल मेमोरियल अस्पताल एवं अनुसन्धान केंद्र की पहचान राष्ट्रीय स्तर के सुपर स्पेशिऐलटि अस्पताल के रूप में थी जहाँ बारह से ज्यादा उच्चत्तर चिकित्सा विभागों में कंसल्टेंट कार्यरत रहते थे और आठ बाह्य चिकित्सा यूनिट्स…

महिला हिंसा : अपनों को ही कैसे मार डालते हैं लोग

दुनिया भर में जो महिलायें हत्या का शिकार होती हैं, उनमें से चालीस फीसदी की हत्या की जाती है, उनके पूर्व प्रेमियों या पतियों द्वारा. घर महिलाओं के लिए एक खतरनाक युद्धभूमि बन जाता है, जहाँ सबसे अधिक रक्तपात की…

पातालकोट के ‘पीवीटीजी’ : भारिया के बहाने आदिवासी विमर्श

चाहे विधानसभाओं, संसद के चुनाव हों या जगह-जगह जारी समाजसेवा,नक्सलवाद हो या मौजूदा विकास की परियोजनाएं,आदिवासियों के बिना किसी की कोई दाल नहीं गलती। दूसरी तरफ,वे ही आदिवासी सर्वाधिक बदहाली भी भोगते हैं। देशभर में करीब आठ फीसदी आबादी वाली…

भारत जोड़ो यात्रा : सत्ता में क्यों घबराहट है राहुल गांधी की पदचाप से

राहुल जीते जागते सौम्य समझदार गंभीर वृत्ति के मजबूत कद काठी के नेक दिल इंसान है जैसा कि उनसे यात्रा में मिले कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओ का यह अनुभव है। लोग उनसे प्रभावित भी होते है। उनको अपने बीच आम वेशभूषा…

म़ीडिया : अगड़ी जातियों की गिरफ्त में म़ीडिया

एक ठीक दर्शक या पाठक की तरह आंख-कान खोलकर देखें तो अनुसूचित जातियों, जनजातियों, महिलाओं, अल्पसंख्यकों जैसे तबकों को मीडिया में मिलने वाली नगण्‍य सी जगहें साफ देखी जा सकती हैं। विडंबना यह है कि हमारी कुल आबादी में ये…

आर्थिक विकास : गिरता रुपया, चढ़ता डॉलर

‘जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय’ (जेएनयू) से अर्थशास्त्र पढीं देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की इस बात में कितना दम है कि रुपए के गिरने की वजह डॉलर का मजबूत होना है? ध्यान से देखें तो उनकी यह टिप्पणी समूचे अर्थतंत्र को…

गंगा : मैली रह गईं मोक्षदायिनी

हमारे समाज के पाखंड को देखने का एक आसान तरीका नदियों की बदहाली का भी है। जिन नदियों को हम अहर्निश पूजते, माता का दर्जा तक देते हैं, उनमें तरह-तरह की औद्योगिक, रासायनिक और अस्पताली गंदगियों को उडेलते हुए कोई…