कृषि संसार

सावधान! आपकी थाली के शाकाहार में छुपा हो सकता है मांसाहार

मालवा निमाड़ के खेतों में पैदा होने वाली सरसों के साथ बैंगन, सोयाबीन आदि जैसी फसलों और साग-भाजी के साथ फल आपकी थाली में परोसे जाएं और इनके शाकाहारी या मांसाहार होने का भेद नहीं कर पाए तो क्या होगा? ऐसे प्रकृति…

समर्थन मूल्य की समीक्षा : मध्यप्रदेश में सोयाबीन

इन दिनों सोयाबीन को लेकर मध्यप्रदेश में भारी बवाल मचा है। फसल की लागत और लगातार बढ़ते अन्य खर्चों के चलते किसान सोयाबीन का ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ बढ़वाने के लिए आंदोलनरत हैं और सरकार इसे लेकर ना-नुकुर कर रही है।…

खेती : संकट में सोयाबीन

रोजमर्रा के भोजन में आमतौर पर कम हैसियत रखने वाली बाजार-हितैषी सोयाबीन के किसानों पर आजकल भारी संकट तारी है। लागत, मेहनत और परिवहन-भंडारण की उन्हें इतनी कम कीमत मिल रही है कि वे दूसरी कतिपय फसलों की तरह सोयाबीन…

खेती को खोखला कर देंगी, जीएम फसलें

दबावों के बावजूद यूरोपियन यूनियन (ईयू) के 27 देशों समेत कई देशों में प्रतिबंधित ‘जीनेटिकली मॉडीफाइड’ फसलों को दुनियाभर में पैदावार बढ़ाने के तर्क की बुनियाद पर फैलाया जा रहा है, हालांकि सब जानते हैं कि इसके पीछे अमरीकी बहुराष्ट्रीय…

उत्तराखंड : खुद के भरोसे की खेती

अपनी समझ और संसाधनों की उपलब्धता के चलते किसान कई बार खेती की ऐसी पद्धति वापरते हैं जिससे एक तरफ तो पर्यावरण का संरक्षण होता है और दूसरी तरफ, जीवन जीने लायक उपज मिल जाती है। हिमालय के सुदूर ग्रामीण…

खेती : छोटे किसानों की छीछालेदर

कृषि अर्थव्यवस्था के जानकार मानते हैं कि खेती को बरकरार रखने, विकसित करने और सबका पेट भरने की अधिकांश जिम्मेदारी छोटे और सीमांत किसान ही निभाते हैं। जहां 70% ग्रामीण परिवार अभी भी अपनी आय के प्राथमिक स्रोत के रूप…

कृषि संंसार : जीवन-दायिनी है, ज़हरमुक्त खेती 

मौजूदा कृषि कितनी जहरीली है और उसकी पैदावार के कितने खतरनाक प्रभाव हो रहे हैं, इसे जानने के लिए किसी रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं है। सवाल है, क्या हम अपने आसपास से लगाकर वैश्विक स्तर के अनुभवों से सीखकर…

भारतीय किसानों की जैविक-खेती : अलबर्ट हॉवर्ड ने दिलाई थी याद

उन्नीसवीं सदी में औद्योगिक क्रांति के साथ खेती में रसायनों का प्रयोग और नतीजे में अधिक लागत से अधिक उत्पादन का चलन शुरु हुआ था। इस कथित कृषि-विकास के परिणामों पर बीसवीं सदी की शुरुआत में कृषि-वैज्ञानिक अलबर्ट हावर्ड ने…

परमार्थ : गांव में टिकाऊ आजीविका

थोडी समझदारी और सहयोग से काम किया जाए तो खेती आज भी रोजगार का बेहतरीन जरिया बन सकती है। उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में सक्रिय स्वयंसेवी संस्था ‘परमार्थ’ ने इसी का प्रयास किया है। सोना सहरिया एक आदिवासी महिला है…

फसल बीमा : कंपनियों ने लूटे हजारों करोड़

प्राकृतिक और मानवीय त्रासदियों के कारण खेती में होने वाले नुकसान से निपटने के लिए सरकार ने बीमा-योजना बनाई है। कहा जा रहा है कि मामूली प्रीमियम देकर किसान आपदाओं से खुद को सुरक्षित कर सकता है, लेकिन देशी-विदेशी कंपनियों…