World Biofuel Day : मानव जीवन के सुनहरे भविष्य की निधि बन सकता है जैव ईंधन

योगेश कुमार गोयल

जलवायु परिवर्तन और पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता के कारण बढ़ते पर्यावरणीय संकट के बीच जैव ईंधन एक टिकाऊ और स्वच्छ विकल्प के रूप में उभर रहा है। 10 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व जैव ईंधन दिवस ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और ग्रामीण विकास को प्रोत्साहित करने में इसकी भूमिका को रेखांकित करता है, जो पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

विश्व जैव ईंधन दिवस 10 अगस्त

पिछले कुछ वर्षों से पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव झेल रही है और जलवायु परिवर्तन के कारण सामने आ रही प्राकृतिक आपदाओं की संख्या एवं तीव्रता निरन्तर बढ़ रही है। जलवायु परिवर्तन के ही कारण हमारा पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ गया है, जिसका असर अब जीवन के लगभग हर क्षेत्र में स्पष्ट देखने को मिल रहा है। जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा कारण मनुष्यों द्वारा पारम्परिक जीवाश्म ईंधन का बड़े स्तर पर दोहन किया जाना भी है, जिसका पर्यावरण पर बेहद खतरनाक प्रभाव देखा जा रहा है। यही कारण है कि पारम्परिक जीवाश्म ईंधन के बजाय अपरम्परागत जीवाश्म ईंधन को इस्तेमाल करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

पारम्परिक जीवाश्म ईंधन के विकल्पों के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए ही प्रतिवर्ष 10 अगस्त को ‘विश्व जैव ईंधन दिवस’ मनाया जाता है। यह दिवस मनाने का उद्देश्य वातावरण में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने, ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण विकास का समर्थन करने में जैव ईंधन के महत्व को पारंपरिक जीवाश्म ईंधन के एक स्थायी विकल्प के रूप में उजागर करना है। जलवायु परिवर्तन में होती वृद्धि के साथ वैश्विक ऊर्जा खपत पैटर्न में बदलाव अब समय की बड़ी मांग है, इसीलिए जैव ईंधन दिवस के माध्यम से दुनियाभर में लोगों को अक्षय ऊर्जा स्रोतों को गैर-नवीकरणीय जीवाश्म ईंधन से बदलने के लिए प्रोत्साहन देने के प्रयास किए जा रहे हैं।

See also  मध्यप्रदेश जलवायु परिवर्तन कार्य योजना पर जबलपुर में क्षेत्रीय जन संवाद सम्‍पन्‍न

भारत में विश्व जैव ईंधन दिवस पहली बार अगस्त 2015 में पैट्रोलियम और गैस मंत्रालय द्वारा मनाया गया था। देश में जैव ईंधन का विकास स्वच्छ भारत अभियान और आत्मनिर्भर भारत अभियान जैसी योजनाओं के अनुरूप ही है। दुनियाभर में अब जैव ईंधन को हमारा भविष्य बचाने के लिए एक उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है। दुबई में हुए ‘कॉप-28’ में 28वें संयुक्‍त राष्‍ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन 2050 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने और जीवाश्म ईंधन से दूर रहने का आह्वान किया गया था और संयुक्त राष्ट्र जलवायु कांफ्रैंस के इतिहास में ऐसा सुझाव पहली बार दिया गया था। हालांकि यह अलग बात है कि जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से चलन से बाहर करने का इसमें कोई उल्लेख नहीं था।

नई दिल्ली में जी20 शिखर सम्मेलन के अवसर पर 9 सितंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस’ (वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन) की शुरुआत भी की गई थी। जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए भारत की पहल पर बनाए गए इस गठबंधन के प्रमख उद्देश्यों में प्रौद्योगिकी प्रगति को सुविधाजनक बनाना, टिकाऊ जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देना, हितधारकों के व्यापक स्पेक्ट्रम की भागीदारी के जरिये मजबूत मानक सेटिंग, बायोफ्यूल मार्केट को मजबूत करना, वैश्विक बायोफ्यूल कारोबार को सुविधाजनक बनाना, तकनीकी सहायता प्रदान करना इत्यादि शामिल हैं।

जैव ईंधन को ऊर्जा के किसी भी स्रोत, जो जैविक सामग्री हो, जैसे कृषि अपशिष्ट, फसल, पेड़ अथवा घास से निकाला जाता है। जैव ईंधन पर्यावरण के अनुकूल ईंधन हैं, जो कम समय में उत्पादित होते हैं और तरल अथवा गैसीय रूप में संग्रहीत किए जाते हैं। जीवाश्म ईंधन के विपरीत, जैव ईंधन प्रकृति में नवीकरणीय, बायोडिग्रेडेबल और टिकाऊ होते हैं। पारम्परिक जीवाश्म ईंधन की तुलना में जैव ईंधन में सल्फर नहीं होता और कार्बन मोनोऑक्साइड तथा विषाक्त उत्सर्जन भी कम होता है। कार्बन के किसी भी स्रोत से जैव ईंधन का उत्पादन किया जा सकता है। चूंकि जैव ईंधन को बायोमास संसाधनों की मदद से बनाया जाता है, इसीलिए इसे पुनः बनाया जा सकता है। एक ओर जहां जीवाश्म ईंधन के जलने से कार्बन उत्सर्जन होता है और यह हमारे वातावरण तथा पर्यावरण के लिए अत्यंत हानिकारक है, वहीं जैव ईंधन न केवल कार्बन उत्सर्जन को कम करते हुए स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करता है बल्कि कच्चे तेल पर हमारी निर्भरता को कम करने की कुंजी भी है।

See also  ताप-विद्युत बनाम ‘अक्षय-ऊर्जा’ : कोयले की कालिख

पारम्परिक ईंधन का वैकल्पिक संस्करण जैव ईंधन पर्यावरण को बेहतर बनाता है। जैव ईंधन ऊर्जा का नवीकरणीय और जैव निम्नीकरणीय स्रोत होता है, जो नवीकरणीय संसाधनों से बनता है और जीवाश्म डीजल की तुलना में अपेक्षाकृत कम ज्वलनशील है। यह कृषि अपशिष्ट अथवा पेड़-पौधों और फसलों, वनस्पति, पशु अपशिष्ट, शैवाल, औद्योगिक अपशिष्ट इत्यादि किसी भी प्रकार की जैविक सामग्री से उत्पन्न हो सकता है, जिसमें काफी बेहतर चिकनाई वाले गुण होते हैं। एक ओर जहां कोयले अथवा तेल के जलने से वैश्विक तापमान में वृद्धि होती है और ये ईंधन ग्लोबल वार्मिंग का बहुत बड़ा कारण बनते हैं, वहीं जैव ईंधन मानक डीजल की तुलना में कम हानिकारक कार्बन उत्सर्जन का कारण बनता है और ग्रीनहाउस गैसों के प्रभाव को कम करता है।

भारत उन्नत जैव ईंधन क्षेत्र के उत्पादन के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर काम कर रहा है। अधिकांश पर्यावरणविदों का यही मानना है कि जहां जीवाश्म ईंधन बहुत कीमती हैं, वहीं जैव ईंधन सबसे बुद्धिमान ऊर्जा विकल्प है और जो चीज लागत प्रभावी, कुशल, टिकाऊ एवं नवीकरणीय हो, वह सदैव बेहतर होती है।

भारत में विभिन्न प्रकार के जैव ईंधन के उपयोग की ओर कदम बढ़ाए जा चुके हैं, जिनमें बायोइथेनॉल, बायोडीजल, ड्रॉप-इन ईंधन, बायो-सीएनजी, उन्नत जैव ईंधन इत्यादि प्रमुख हैं। जैव ईंधन के उपयोग को प्रोत्साहित करने वाली कई योजनाएं शुरू की जा चुकी हैं। केन्द्र सरकार द्वारा जून 2018 में जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति को स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिसका लक्ष्य 2030 तक 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण और 5 प्रतिशत बायोडीजल मिश्रण के लक्ष्य तक पहुंचना है। यह योजना उन्नत जैव ईंधन के उत्पादन को प्रोत्साहित करती है।

See also  ऊर्जा : सौर से सस्ती होगी बिजली

बहरहाल, दुनियाभर में जैव ईंधन का उपयोग बढ़ाए जाने के कई प्रमुख लाभ हो सकते हैं, जैसे इससे कच्चे तेल पर निर्भरता कम होने से जहां पर्यावरण में अपेक्षित सुधार होने की प्रबल संभावनाएं हैं, वहीं इससे खासकर ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में भी ऊर्जा पहुंचाई जा सकेगी, साथ ही परिवहन ईंधन की बढ़ती मांग को भी आसानी से पूरा किया जा सकेगा।

इस समय वाहनों के लिए उपयोग होने वाले पारम्परिक ईंधन और प्राकृतिक गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं और आने वाले समय में इनके दामों में और बढ़ोतरी होगी। ऐसे में जैव ईंधन को बढ़ावा देना समय की बहुत बड़ी मांग है क्योंकि यह ईंधन अन्य ईंधन की कीमतों की तुलना में न केवल सस्ते हैं बल्कि ऊर्जा के अच्छे स्रोत भी हैं, जो प्रदूषण भी नहीं फैलाते। चूंकि जैव ईंधन नवीकरणीय बायोमास संसाधनों के माध्यम से बनाए जाते हैं, इसलिए इनके उपयोग को बढ़ावा देने से पर्यावरण प्रदूषण से मुक्ति मिल सकती है। जैव ईंधन समाज के एक बड़े हिस्से के लिए आय और रोजगार पैदा करने में भी बड़ी मदद कर सकता है। माना जा रहा है कि जैव ईंधन पर्यावरण को कोई नुकसान पहुंचाए बगैर इस सदी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बड़ी मदद करेगा।

Table of Contents

सागर से अंतरिक्ष तक : रक्षा विमर्श को नई दिशा देती शोधपरक कृति

भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और वैश्विक प्रतिष्ठा से जुड़ा रक्षा विमर्श केवल सैन्य शक्ति का वर्णन नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामरिक चेतना का दर्पण होता है। ऐसे समय में वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार गोयल की पुस्तक ‘सागर से अंतरिक्ष तक:

Read More »

अपने जैसा ‘एआई’

‘आर्टीफीशियल इंटेलीजेंस’ उर्फ ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ के कसीदे बांचते हुए हम अक्सर इस मामूली सी बात को भूल जाते हैं कि ‘एआई’ आखिरकार एक व्यक्ति और समाज की तरह हमारा ही प्रतिरूप है। यानि हम उस मशीन में जैसा और जितना

Read More »

मध्यप्रदेश का बजट : ग्रीन फ्रेमवर्क का दावा, जलवायु संकट की अनदेखी

हाल के मध्यप्रदेश के बजट में तरह-तरह की लोक-लुभावन घोषणाओं के बावजूद पर्यावरण-प्रदूषण से निपटने की कोई तजबीज जाहिर नहीं हुई है। यहां तक कि पर्यावरण के लिए आवंटित राशि भी पिछले साल के मुकाबले घटा दी गई है। आखिर

Read More »