नीलेश दुबे

बाल विवाह : बदहाली की एक और वजह

अंग्रेजों और चंद तरक्की-पसंद हिन्दुस्तानियों की पहल पर लगभग एक सदी पहले बाल-विवाह विरोधी कानून बना था, लेकिन देश के किसी राज्य में आज तक बाल-विवाह पर कोई कारगर प्रतिबंध नहीं लग पाया है। देश के अधिकांश राज्यों में, कुछ अपवादों…

मध्यप्रदेश : बच्चों के लिए बजट

आजकल सरकारों के सालाना बजट में तरह-तरह के प्रयोग होने लगे हैं। हाल में विधानसभा में प्रस्तुत किए गए मध्‍यप्रदेश के बजट में ‘चाइल्ड बजट’ उसी तरह का एक प्रयोग है। इसे राज्य के अनेक विभागों को आवंटित राशि में…

यातायात : असुरक्षित हैं, सड़कें

किसी को शारीरिक क्षति पहुंचाने की आज भी सर्वाधिक आसान तरकीब सड़क दुर्घटना है। मोटर, ट्रक, दो-पहिया जैसे स्वचालित वाहनों से किसी को ठोंक देने और नतीजे में गंभीर चोट, मृत्यु तक का दंड, जुर्माना आज भी परिणामों के मुकाबले…

कोरोना पीडितों के लिए कितने तैयार हैं, हमारे स्‍कूल?

मौजूदा महामारी से घबराकर अपने-अपने गांवों-घरों की ओर लौटते लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे रास्‍ते के स्‍कूलों में ‘लॉक डाउन’ के चलते कुछ दिन रुक जाएं। यह आग्रह उनसे भी किया जा रहा है जो शहरों,…

बिजली का बेहतर विकल्प हो सकती है, अक्षय ऊर्जा

नीलेश दुबे  ऊर्जा की खपत से विकास को मापने के इस दौर में ऊर्जा उत्पादन के तरीकों पर गहराई से विचार करने की जरूरत है। क्या हम व्यापक विस्थापन, भारी पर्यावरण विनाश और असीमित आर्थिक बदहाली की कीमत पर पारम्परिक…

पर्यावरणीय आपातकाल-जीवन के लिए खतरे की घंटी!

यह पर्यावरण की बजाए खुद को बचाने का दौर है। इंसानी बिरादरी ने अपने धतकरमों की मार्फत समूचे सचराचर जगत को जिन हालातों में ला पटका है, उससे कोई उम्मीद तो दिखाई नहीं देती, लेकिन फिर भी चंद समझदारों के…