मीनाक्षी नटराजन

शिक्षा : शैक्षणिक परिसरों में समता और संविधान

देश के ‘प्रीमियम’ शिक्षण संस्थानों में भांति-भांति के दबावों के चलते होने वाली आत्महत्याएं और इनमें भी दलितों, आदिवासियों, पिछडों और अल्पसंख्यकों की बहुतायत हमारी शिक्षा-पद्धति से लगाकर सामाजिक ताने-बाने तक पर गंभीर सवाल खडे कर रही हैं। क्या हैं,…

विकास : ‘मरीचिकाओं’ के महारथी

कहा जाता है कि राजनीति का कुल मतलब ‘रोटी’ और ‘सर्कस’ होता है, लेकिन लगता है, मौजूदा सत्ता केवल ‘सर्कस’ को ही अहमियत दे रही है। नतीजे में एक तरफ भुखमरी, बेरोजगारी, बीमारी जैसी व्याधियां हैं, तो दूसरी तरफ, रोज…

यात्रा : भुलाई जा रहीं ‘भारत-माता’

आजकल चहुंदिस फैले राष्ट्रवाद में भारत–माता को देखें तो क्या दिखाई देगा? क्या अपने आसपास का संसार वैसा ही खाता-अघाता, चमकदार है जैसा एक जमाने की फिल्मों में यदा-कदा दिखाया जाता था? या फिर हमारी भारत-माता के ऐसे भी असंख्य…