मेधा पाटकर

पूंजी के लिए पर्यटन : किसका लाभ, किसकी हानि?

विनाशकारी विकास की हवस में हमारे सत्ताधारियों ने उन छह गांवों को सिरे से भुला दिया है जिनकी जमीनों पर साठ के दशक में ‘सरदार सरोवर परियोजना’ बनाने वालों की बस्ती बसाई गई थी। आजकल उसी इलाके में ‘स्टैच्यू ऑफ…

नर्मदा : बे-पानी बड़वानी के पडौस में सूखती नर्मदा

‘सरदार सरोवर’ निर्माण के दौरान जो सब्जबाग दिखाए गए थे उनमें पेयजल, सिंचाई और निस्तार के लिए भरपूर पानी का वायदा अव्वल था। आज करीब छह दशक बाद इस वायदे की हकीकत क्या है? सदानीरा नर्मदा के लगभग किनारे पर…

नर्मदा आंदोलन के सारथी : आखरी दम तक अहिंसक सत्याग्रही रहे जामसिंग भाई

लंबे समय पर नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुडे धार जिले के वरिष्‍ठ साथी जामसिंह भाई का हाल ही में देहांत हो गया । जामसिंह भाई की जमीन नर्मदा बांध की डूब में आई। वे विस्‍थापितों के हक में लगातार संघर्षरत…

सीताराम बाबा : एक सदैव जलती मशाल !

तीन दशक से ज्यादा का ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन’ उन अनेक स्थानीय, अनजान कार्यकर्ताओं की अद्भुद जिजीविषा और संघर्ष के हौसले से अपनी सफल यात्रा कर सका है। इनमें से एक थे – कडमाल गांव के सीताराम बाबा। तीन सितम्बर को…

93 साल के आजन्म युवा आंदोलनकारी थे जगन्नाथ काका !

स्‍मृति शेष : श्रध्‍दांजलि जगन्नाथ काका नहीं रहे| नर्मदा घाटी का एक और सितारा बुझ गया | सालों से वृध्दत्व को नकारते, कई बार गिरते, फ्रेकचर लेकर भी दौड़ते काका शांत हो गये| उनकी जीवनज्योत हमारे लिए जलती रहेगी जरुर…

सर्वस्व ‘लुटाने’ वाले बांध प्रभावितों से राजनीति करती रहीं, पिछली सरकारें

नर्मदा पर बने ‘सरदार सरोवर’ बांध के विस्थापितों को बरसों बाद अपने हक में कुछ सकारात्मक होता दिखाई दिया है। पिछली केन्द्र और राज्य सरकारों के ‘शून्य’ विस्थापन-पुनर्वास मानने के बरक्स मध्यप्रदेश की नई सरकार ने विस्थापितों की उनके गांवों…