कुमार प्रशांत

सामयिक : एक था, ‘एयर इंडिया’

कई सालों की मशक्कत के बाद हाल में टाटा कंपनी को ‘एयर इंडिया’ बेचकर मचाई जा रही बल्ले-बल्ले में किसी को उसकी अंतर्कथा दिखाई ही नहीं दे रही। यानि कि अभी कुछ साल पहले तक ठाठ से चलने वाली हमारे…

आप कैसे चुप हो सकती हैं, कमला जी?

श्रद्धांजलि : कमला भसीन वे बहुत जिंदादिल थीं इसलिए बहुत मजबूत थीं; वे बहुत मजबूत थीं इसलिए कटु नहीं थीं; वे कटु नहीं थीं इसलिए बहुत मानवीय थीं। पुरुष के आधिपत्य से और उसके अहंकार से वे बहुत बिदकती थीं।…

नजरिया : क्या भूलूं, क्या याद करूं?

हम क्या भूलें ? उस दरिंदगी को भूलें जिसे विभीषिका कहा जा रहा है। वह विभीषिका नहीं थी, क्योंकि वह आसमानी नहीं, इंसानी थी। उसे इतिहास के किसी अंधेरे कोने में दफ्न हो जाने देना चाहिए क्योंकि वह हमें गिराता…

इस देश में देशभक्त ज्यादा हैं या देशद्रोही ?

संदर्भ पेगासस जासूसी दो सौ से ज्यादा सालों तक हमारे ऊपर बलपूर्वक शासन करनेवाले अंग्रेज खोज कर भी जितने देशद्रोही नहीं खोज पाए थे, हमने महज सात सालों में उससे ज्यादा देशद्रोही पैदा कर दिए। अब तो शंका यह होने…

मुझे भी कुछ कहना है, मी लार्ड !

लोकतांत्रिक प्रणाली में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका आपसी संतुलन बनाकर काम करती हैं, यानि इनमें से कोई भी, किसी तरह की गडबडी करे तो बाकी के अंग उसे सुधारने के लिए अंकुश लगाते हैं, लेकिन मौजूदा दौर की घटनाएं लोकतंत्र…

यह हमारी नहीं, पूंजी और सत्ता की लड़ाई है

डिजीटल प्लेटफॉर्म हैं दुनिया में वे सब पूंजी— बड़ी-से-बड़ी पूंजी— की ताकत पर खड़े हैं। छोटे-तो-छोटे, बड़े-बड़े मुल्कों की आज हिम्मत नहीं है कि इन प्लेटफॉर्मों को सीधी चुनौती दे सकें। इसलिए हाइटेक की मनमानी जारी है। उसकी आजादी की,…

‘…बर्लिन के उस लेखक ने तो कमाल का सिद्धांत ही बना दिया है …’

फलस्तीन-इसरायल विवाद फलस्तीन-इसरायल विवाद पर प्रारंभ से महात्मा गांधी की नजर थी और वे हर संभव मौके पर उस विवाद को एक रचनात्मक मोड़ देने की कोशिश करते रहे थे. अपने देश की आजादी की अनोखी लड़ाई का नेतृ्त्व करते…

“ उनसे मेरी गहरी मित्रता भी मुझे न्याय देखने से रोक नहीं सकती है….”

संदर्भ : फलस्तीन(हमास)-इस्रायल युद्ध हाल के फलस्तीन(हमास)-इस्रायल युद्ध के बाद अब इस वैश्विक समस्या के हल की गरज से तरह-तरह की आवाजें उठने लगी हैं। महात्मा गांधी होते तो वे इस मसले पर क्या कहते? प्रस्तुत है,गांधी के नजरिए से…

Opinion : खेल के साथ खेल करने का अपराध

सुशील कुमार ने अपनी सफलता को मनमानी का लाइसेंस समझ लिया। खेल के सारे व्यापारियों ने उसकी इस समझ को सुलझाया नहीं, भटकाया-बढ़ाया। अब हम देख रहे हैं कि सुशील कुमार पर हत्या का ही आरोप नहीं है बल्कि असामाजिक-अपराधियों…

अंतर्राष्‍ट्रीय / लंगड़ी दुनिया की अंधी दौड़

म्यांमार और इस्रायल में इन दिनों जो हो रहा है, उसे किसी दूसरी तरह से समझना संभव ही नहीं है। इसे म्यांमार के तानाशाहों व म्यांमार की जनता का अंदरूनी मामला मान लिया गया है। वहीं फलस्तीन को यह समझना…