अशोक कुमार शरण

महात्मा गांधी की धार्मिक आस्था

खुद को सनातनी हिन्दू मानने वाले महात्मा गांधी आखिर कैसे हिन्दू थे? क्या किसी खास धर्म का अनुयायी होने के साथ-साथ गांधी की तरह उदारता को आत्मसात किया जा सकता है? आज देश में धर्म के नाम पर काफी राजनैतिक…

गांधी जयंती : महात्‍मा गांधी के रचनात्मक कार्य

महात्मा गांधी ने अपने विचारों के क्रियान्वयन के लिए अनेक संस्थाओं का निर्माण किया था। 48 में, उनके जाने के बाद सभी को मिलाकर दो प्रमुख संस्थाएं बनाई गईं, परन्तु आज इन संस्थाओं के क्या हाल हैं? क्या आज भी…

बुनकरों की बदहाली : दवा के साथ दुगना होता मर्ज

हथकरघा उद्योग आज भी रोजगार का एक कारगर साधन है, लेकिन हमारी सरकारें और उनकी नीतियां उसे अपेक्षित महत्व नहीं देतीं। नतीजे में यह उद्योग ठप्प होता जा रहा है। फिलहाल क्या हालत है, हथकरघा उद्योग की? सात अगस्त, 1905 को…

पर्यावरण : Ground water भूजल को भूलने के भयावह नतीजे

जल संरक्षण-संवर्धन के भांति-भांति के तौर-तरीकों के बाद अंतत: हम भूजल की शरण में ही आते हैं, लेकिन उसके प्रति हमारा आम, दैनिक व्यवहार क्या है? क्या हमारे मौजूदा दुर्व्यवहार के चलते भूजल बच पाएगा? और क्या ऐसे में हम…

खतरे में ‘सेवाग्राम’ की खादी

सरकारें अपनी हेठी में अब उस हद को भी पार करने लगी हैं जिसे महात्मा गांधी ने आजादी के आंदोलन की बुनियाद बनाया था। हाल का मामला उस ‘सेवाग्राम आश्रम’ की खादी का है जहां बरसों-बरस खुद गांधी चरखा कातते…

गांधी का धर्म और धर्म की राजनीति

आजकल महात्मा गांधी को सार्वजनिक तौर पर तरह-तरह से अपमानित करने का चलन हो गया है। मौजूदा सत्ता की शह पर गांधी को, उनकी धार्मिक मान्यताओं के लिए भी गरियाया जाता है। तो क्या गांधी के धार्मिक विश्वास तत्कालीन धार्मिक…

हथकरघा के हाल, बेहाल

देश में आज भी कृषि के बाद दूसरा, सर्वाधिक रोजगार देने वाला हैन्डलूम क्षेत्र, जिसमें आजादी के आंदोलन की प्रतीक खादी भी शामिल है, किस हाल में है? अनुभव और आंकडे बताते हैं कि सरकारी नीतियों और उनके अमल ने…

खादी खड़ी बाजार में

आजादी के आंदोलन में जिस खादी को संघर्ष के एक कारगर औजार की हैसियत से नवाजा गया था, वह खादी आज बाजार में तरह-तरह के दबावों के चलते अपना अस्तित्व तक गंवा रही है। सवाल है, वस्त्र-स्वावलंबन की मार्फत आजादी…

राहत की राजनीति

कोरोना के कहर ने राहत की राजनीति को भी उजागर कर दिया है। प्राकृतिक, मानव-निर्मित आपदाओं में पीडित-प्रभावितों की मदद के लिए बहत्‍तर सालों से सक्रिय  ‘प्रधानमंत्री राष्‍ट्रीय सहायता कोष’ को खिसकाकर अब नया ‘प्रधानमंत्री केयर्स फंड’ लाया जा रहा है। कहा जा…