अभिलाष खांडेकर

अस्तित्व के लिए जूझती नदी

पुस्तक समीक्षा पिछले दिनों ‘नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण’ में लम्‍बे समय जनसंपर्क अधिकारी रहे आदिल खान की ‘सरदार सरोवर परियोजना’ और उसका विरोध कर रहे ‘नर्मदा बचाओ आंदेालन’ के इतिहास पर एक किताब आई है। प्रस्‍तुत है, इस किताब की…

नकारा नियोजन की चपेट में फंसा शहर

हमारे किसी भी आकार-प्रकार के शहरों में चंद मिनटों की बरसात बाढ ला देती है और यह कारनामा पानी के प्राकृतिक स्रोतों, ठिकानों और सहज रास्‍तों पर अट्टालिकाएं खडी करने से होता है। कमाल यह है कि इसे अमली जामा…

‘गुना’ से फिर गूंजी, पुलिस-सुधारों की बात !

देशभर में आए दिन पुलिस वालों के कारनामे उजागर होते रहते हैं और यदि बवाल न मचे तो ठंडे भी पड जाते हैं, लेकिन क्‍या पुलिस की मौजूदा बनक में ये कारनामे कोई अजूबा माने जा सकते हैं? क्‍या किसी…