रायपुर राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य सम्मेलन में पारित हुए महत्वपूर्ण प्रस्ताव
रायपुर, 10 दिसंबर। स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण और व्यावसायीकरण से उत्पन्न खतरे को रोकने के लिए राष्ट्रीय अभियान चलाने तथा अप्रैल 2026 में व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य पर पखवाड़ा मनाने जाने जैसे दो प्रमुख प्रस्तावों के साथ राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य सम्मेलन आज यहां संपन्न हुआ। इसके साथ ही यह घोषणा की गई कि जयपुर में व्यावसायिक और पर्यावरणीय स्वास्थ्य विषय पर एक राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जो जन स्वास्थ्य आंदोलन को व्यापक राष्ट्रीय स्वर देगा। इन प्रस्तावों को सम्मेलन की दिशा और आगामी सार्वजनिक स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के लिए महत्वपूर्ण माना गया।
जन स्वास्थ्य अभ्यिान इंडिया के बैनर तले रायपुर में 8-9 दिसंबर को आयोजित दो दिवसीय जन स्वास्थ्य सम्मेलन में 19 राज्यों से आए लगभग 350 स्वास्थ्य नेतृत्वकर्ताओं, जन आंदोलनों के प्रतिनिधियों, एक्टिविस्ट्स और समुदाय संगठनों ने सहभागिता की। सम्मेलन का उद्देश्य गंभीर होती स्वास्थ्य चुनौतियों को नीतिगत प्राथमिकता में लाना, सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की मांग को आगे बढ़ाना और जमीनी स्तर पर जन स्वास्थ्य आंदोलन को रणनीतिक रूप से सुदृढ़ करना था।
सम्मेलन के प्रारंभिक सत्र में वक्ताओं ने सरकार की मौजूदा स्वास्थ्य नीतियों और बढ़ते निजीकरण पर गहरी चिंता व्यक्त की। विशेष रूप से नीति आयोग के हालिया सर्कुलर का उल्लेख किया गया, जिसमें जिला अस्पतालों के संचालन के लिए पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को बढ़ावा दिया गया है। प्रतिभागियों का कहना था कि यह मॉडल सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करने के साथ-साथ सबसे जरूरतमंद आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को और मुश्किल बना देगा।
मुख्य वक्ता कम्युनिटी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. रितु प्रिया ने अपनी चर्चा के दौरान नज़रिए में बड़े बदलाव की मांग की। लंबे समय से स्वास्थ्य को केवल डॉक्टरों और अस्पतालों की सीमाओं में समझने की गलती की जाती रही है, जबकि एक स्वस्थ समाज नीचे से ऊपर की ओर बनता है। उन्होंने कहा, “हमें समुदाय के तरीकों, पारंपरिक ज्ञान और हमारी आधी आबादी की सेवा करने वाले इनफॉर्मल डॉक्टरों की ताकत को मान्यता व स्थान देना होगा। एक सच्चा स्वस्थ समाज ज़मीन से बनता है, ऊपर से थोपा नहीं जाता।” उन्होंने कहा कि नवउदारवादी नीतियों ने दशकों में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर किया है और इसका नतीजा यह हुआ है कि मौजूदा सरकार चिकित्सा शिक्षा और सेवा, उपकरणों एवं दवाओं के निजीकरण का व्यापक एजेंडा बना रही है, जिससे हेल्थकेयर असल में अधिकार के बजाय एक बाजार बन गया है।
ग्रीन नोबेल अवार्डी प्रफुल्ल सामंतरा ने आरोप लगाया कि सरकार जनविरोधी नीतियों का निर्माण कर रही है और संविधान में निहित समानता तथा समावेशिता की मूल भावना पर आघात कर रही है। उन्होंने कहा कि “निजी लाभ के लिए जन स्वास्थ्य को व्यापार में बदल दिया गया है और आयुष्मान कार्ड जैसी नीतियाँ मरीज़ों की तुलना में कॉर्पोरेट घरानों को अधिक लाभ पहुँचा रही हैं।”
चर्चा के दौरान यह सामने आया कि स्वास्थ्य पर सरकारी आवंटन अभी भी जीडीपी के 1.5% से कम है, जो न्यूनतम निर्धारित 2.5% से काफी नीचे है। स्वास्थ्य बीमा मॉडल की विफलताओं, पर्यावरणीय और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते स्वास्थ्य संकट, वंचित समुदायों की उपेक्षा और महिला हिंसा से जुड़े स्वास्थ्य मुद्दों को भी गंभीर चुनौती के रूप में रेखांकित किया गया।

सम्मेलन में अन्य महत्वपूर्ण प्रस्तावों में जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों पर आधारित सात दिवसीय कोर्स को मार्च 2026 तक शुरू करना, देश के 100 जिलों में मजबूत स्वास्थ्य कार्यकर्ता नेटवर्क का निर्माण, तथा महिला हिंसा, महिला स्वास्थ्य और वंचित समुदायों के स्वास्थ्य के लिए पृथक समूह बनाना शामिल थे। प्रतिनिधियों ने माना कि इन पहलों से जन स्वास्थ्य आंदोलन को व्यापक सामाजिक व राजनीतिक समर्थन मिलेगा।
सम्मेलन के समापन अवसर पर सभी प्रतिनिधियों के सामूहिक विचार-विमर्श से तैयार किया गया जन स्वास्थ्य घोषणा पत्र भी जारी किया गया, जिसमें जन स्वास्थ्य के मुद्दों पर स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय गोलबंदी व सामूहिक कार्रवाई का संकल्प व्यक्त किया गया। इसी दौरान जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया और राष्ट्रीय तथा राज्य कन्वेनरों की घोषणा की गई। एक राष्ट्रीय सलाहकार समूह का गठन भी किया गया, जो अभियान की दिशा और रणनीति निर्माण में मार्गदर्शन देगा।
सम्मेलन के दौरान स्वास्थ्य व्यवस्थाओं एवं स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण और दवाओं के मुद्दों पर आधारित तीन पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में विषय विशेषज्ञों अमितावा गुहा, ऋतु प्रिया, डॉ. सुनीलम, प्रफुल्ल सामंतरा, अमूल्य निधि, कैलाश मीना, राजकुमार सिन्हा एवं समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ ही पीड़ित और प्रभावित दिनेश रायसिंग, चुन्नीजी आदि ने विभिन्न सत्रों में अपने-अपने अनुभव साझा किए।

जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया (JSAI) जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, जमीनी कार्यकर्ताओं, जन आंदोलनों और नागरिकों का एक राष्ट्रीय समन्वय है जो संविधान द्वारा गारंटीकृत सभी भारतीयों के लिए समान और सुलभ स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है। यह अभियान एक मजबूत, सरकारी वित्त पोषित (पब्लिक फंडेड) देखभाल व्यवस्था की वकालत करता है और ज़रूरी सेवाओं के निजीकरण का विरोध करता है।
सम्मेलन के आयोजन और समन्वयन में सरवत नकवी, चंद्रकांत यादव, अमूल्य निधि, गौरांग महापात्रा, संजीव सिन्हा, पुनीता कुमार, राकेश चंदौरे सहित अन्य साथियों की उल्लेखनीय भूमिका रही।


