चुनाव को समझने का एक सरल गणित

प्रो. कन्हैया त्रिपाठी

जंगल की कटाई की जगह वृक्ष-रोपड़ संस्कृति हमारे जीवन का हिस्सा हो। उनकी देखरेख की संस्कृति हमारे जीवन की संस्कृति बने। यह तभी होगा जब हमारी विश्वास की सघनता बढ़ेगी इस प्रकृति से, जल से और हमारे जलवायु से। यह तभी होगा जब हम अपनी नवोदित पीढ़ी में भी प्रकृति से प्रेम करने का बीज अंकुरित कर सकेंगे। ऐसा करने पर, एक अहिंसक सुखद यात्रा का मनुष्य तभी भागीदार बन सकेगा जब हमारे जीवन में हमारे जीवन के संबल होंगे।

राजनीति में रूचि रखने वाले लोग चुनाव के रिजल्ट को आइंसटीन के कठिन सूत्रों की तरह समझने की कोशिश करते रहते हैं और इस कोशिश में वे किसी नेता की सभा में आई भीड़, टेलीवीजन चैनल, मीडिया, व्हाट्सएप आदि के सहारे अपने-अपने अनुमान व्यक्त करते हैं। इसके अलावा अपने धर्म, जाति, वर्ण, वर्ग आदि की बिना पर बने राजनेताओं के भक्त बहुत ही उत्साह से उनके पक्ष में सारे परिणामों को देखते हैं। इस तरह की सोच के पीछे लोगों की अपनी-अपनी आस्थाएं होती हैं। अपने धर्म की परम्परा में राजनैतिक दलों और उनके नेताओं को भी महान देखने की एक दृष्टि विकसित कर ली जाती है। इसके परिणाम कई बार विश्लेषकों के लिए उदास करने वाले हो जाते हैं। 

राजनीति में रूचि रखने वाले लोग चुनाव के रिजल्ट को आइंसटीन के कठिन सूत्रों की तरह समझने की कोशिश करते रहते हैं और इस कोशिश में वे किसी नेता की सभा में आई भीड़, टेलीवीजन चैनल, मीडिया, व्हाट्सएप आदि के सहारे अपने-अपने अनुमान व्यक्त करते हैं। इसके अलावा अपने धर्म, जाति, वर्ण, वर्ग आदि की बिना पर बने राजनेताओं के भक्त बहुत ही उत्साह से उनके पक्ष में सारे परिणामों को देखते हैं। इस तरह की सोच के पीछे लोगों की अपनी-अपनी आस्थाएं होती हैं। अपने धर्म की परम्परा में राजनैतिक दलों और उनके नेताओं को भी महान देखने की एक दृष्टि विकसित कर ली जाती है। इसके परिणाम कई बार विश्लेषकों के लिए उदास करने वाले हो जाते हैं। 

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वास्तव में किसी चुनाव के रिजल्ट और किसी स्कूल के बच्चों के रिजल्ट की पद्धति में कोई विशेष अंतर नहीं होता है। स्कूलों में वे छात्र जो तृतीय श्रेणी में पास होते हैं, अगली परीक्षा में अपने आपको द्वितीय श्रेणी में और तृतीय श्रेणी में पास अपने आपको प्रथम श्रेणी में ले आने की संभावना देखते रहते हैं, परंतु इसके अलावा वे विद्यार्थी भी हैं जिन्हें सबसे अधिक अंक प्राप्त होते हैं। ऐसे विद्यार्थी 100, 95 और 90 प्रतिशत वाले छात्र सदैव भय और चिंता में रहते हैं। उन्हें लगता है कि वे अपना रिजल्ट इस बार पिछली बार की तरह टिकाए रख पायेंगे या नहीं। इसलिए उनको इस बात की चिंता रहती है कि पिछली बार जितने अंक मिले थे, उससे इस बार अंक कम न हों। इसलिए वे यदि उनका कोई विषय कठिन है तो दूसरे विषय में अधिक मेहनत करने लगते हैं। जिससे कि वे अपने सभी विषयों में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें। 

यही स्थिति हमारे राजनैतिक दलों की भी रहती है। वे भी उन राज्यों में अधिक मेहनत करते हैं जिनमें सरलता से अधिक संसद सदस्य प्राप्त हो सकें। बिलकुल स्कूल की बच्चों की तरह राजनैतिक दलों की चिंता उच्च श्रेणी के अंक प्राप्त करने और कुछ को अपना पिछला स्तर बनाये रखने की चिंता रहती है। स्पष्ट होता है कि भाजपा को 2019 में गुजरात में 26 में से 26, मध्यप्रदेश में 29 में से 28, दिल्ली में 7 में से 7, छत्तीसगढ़ में 11 में से 9, राजस्थान में 25 में से 24, उत्तराखंड में 5 में से 5, उत्तरप्रदेश में 80 में से 62, हरियाणा में 10 में से 10 और कर्नाटक में 28 में से 25 संसद सदस्य प्राप्त हुए थे। इस पार्टी को तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश और केरल में एक भी सीट प्राप्त नहीं हुई थी। अब 2019 की तरह परिणाम आना बहुत ही कठिन हो सकता है। इसी को भांपते हुए भाजपा ने दक्षिण भारत के राज्यों में अधिक ताकत लगाना उचित समझा, जो ठीक भी है। तमिलनाडु में वहां के सक्रिय राजनेता रहे अन्ना मलाई के नेतृत्व में भाजपा दक्षिण में संसद सदस्य पाने के लिए प्रयत्नशील है। 

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देश में बनने वाली सरकारों के संबंध में डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर ने संविधानसभा के अध्यक्ष के रूप में एक चेतावनी दी थी- ‘‘मुझे लगता है कि चाहे संविधान कितना भी अच्छा हो, यह बुरा ही साबित होगा, यदि इसे अमल में लाने वाले बुरे होंगे। जबकि एक बुरा संविधान भी अच्छा साबित हो सकता है यदि उसे अमल में लाने वाले अच्छे हों।’’ इसी प्रकार इसी संविधान सभा में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने भी एक महत्वपूर्ण बात कही थी-‘‘यदि लोग, जो चुनकर आयेंगे, योग्य, चरित्रवान और ईमानदार हुए तो वे दोषपूर्ण संविधान को सर्वोत्तम बना देंगे। यदि उनमें गुणों का अभाव हुआ तो संविधान देश की कोई मदद नहीं कर सकता। आखिरकार, एक मशीन की तरह संविधान भी निर्जीव है। इसमें प्राणों का संचार उन व्यक्तियों द्वारा होता है जो इस पर नियंत्रण रखते हैं और भारत को इस समय ऐसे लोगों की जरूरत है जो ईमानदार हों तथा देश के हित को सर्वोपरि रखें।’’

हमारे देश के 97 करोड़ मतदाता इस वर्ष के चुनाव में अपना मतदान करेंगे। यह मतदान पूरे देश में स्थित 10 लाख पोलिंग बूथ पर होगा जिनके माध्यम से हमारी नई सरकार बनेगी। इस चुनाव को संपन्न कराने में लगभग डेढ़ करोड़ मतदान अधिकारी एवं कर्मचारी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद देश के 97 करोड़ मतदाताओं से मतदान कराने के लिए तैयार हैं। यह चुनाव 7 चरणों में 543 क्षेत्रों में संपन्न होंगे। इस चुनाव के 7 चरणों के मतदान के बाद 4 जून को चुनाव के रिजल्ट घोषित किये जायेंगे। एक चरण का मतदान 19 अप्रैल को संपन्न हो चुका है और दूसरे चरण का मतदान 26 अप्रैल को होगा। संपूर्ण चुनाव होने के बाद 4 जून 2024 को गणना का कार्य प्रारंभ होगा और देश के सामने उसकी नई सरकार का प्रारूप आ जायेगा।(सप्रेस)

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