‘गंगा सत्याग्रह’ के समर्थन में देशव्‍यापी सामूहिक उपवास का क्रम शुरू

गंगा नदी की आजादी और निर्मलता-अविरलता के लिए 10 अगस्त 2020 को ‘गंगा सत्याग्रह’ में देश के 108 से ज्यादा स्थानों पर स्वामी सानंद और स्वामी शिवानंद के आमरण अनशन के समर्थन में उपवास कार्यक्रम शुरू हुआ है। उल्‍लेखनीय है कि प्रो. जी.डी. अग्रवाल ने आमरण अनशन करके गंगा नदी की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया, वहीं स्वामी निगमानंद जी, स्वामी नागनाथ जी ने भी बनारस में प्राणों का बलिदान दिया था। इस मायने में भारत के अलग-अलग जगहों पर, जिनके मन, आंखों और हृदय में गंगा बहती है, वे सभी संकल्प लेकर अपना संकल्प पूरा कर रहे है।  जलपुरुष राजेंद्र सिंह की अगुवाई में सत्याग्रह को समर्थन देने बड़ी संख्या में अलग-अलग दल पहुंचे है। उपवासकर्त्‍ताओं की मांग सिर्फ इतनी सी है कि स्वामी सानंद जी की गंगा की आजादी के लिए जो मांगें थीं, उनको पूरा किया जाए। गंगा के लिए एक भक्त परिषद बने, जिसका केंद्र सरकार ने लिखित में आश्‍वस्‍त किया था। खनन और नए बांध गंगा की ऊपरी धाराओं नहीं बने।

       इस उपवास सत्‍याग्रह में भारत ही नहीं, पूरे विश्व में गंगा को चाहने वाले लोग शामिल हुए। मेगसेसे अवार्ड से सम्‍मानित जल पुरूष राजेंद्र सिंह के साथ फिलिप यूके में, फ्रांस में इड़िट, टमेरा में मार्टिन, मिनी जैन लंदन में, ईथन यू.एस में, स्वीडन में ऋषभ खन्ना व सुनीता राऊत आदि गणमान्‍यजन 108 से ज्यादा स्‍थानों पर बैठक कर उपवास शुरु किया। भारत में केरल से राजगोपाल पी.वी., बैंगलौर से आर.एच. साहूकार, बी. आर. पाटिल, तमिलनाडु में गुरुस्वामी, उड़ीसा में सुदर्शनदास, उत्तरप्रदेश में संजय सिंह, महाराष्‍ट्र में डॉ. विनोद बोदनकर, धर्मराज, नरेन्द्र चुग, अनुपम सराफ, सारंग आदि, आन्ध्रप्रदेश में सत्यानारायण, मध्यप्रदेश में वसुदेव, पारस प्रताप, मेरठ में डॉ कृष्णपाल, करौली में चमन सिंह, मासलपुर में रनवीर सिंह, उदयपुर में डॉ तेजराजदान, नंद किशोर, ब्रजकिशोर, कोटा में ब्रजेश विजयवर्गीय, त्रिपुरा में विभूति, असम में हेम भाई, तरुण भारत संघ, जल बिरादरी व परमार्थ के कार्यकर्तागण शामिल हुए। एक मायने में ये सभी प्रबुद्धजन अपने-अपने घर पर रहकर गंगा उपवास कर रहे है।

राजेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को गंगा पर खर्च न करके कानून बनाने की आवश्यकता है। गंगा तीन बीमारी से ग्रसित है- पहली मां गंगा की जमीन पर अतिक्रमण, दूसरी मां गंगा का प्रवाह, जो खनन और बांधों से रोक दिया गया है, तीसरी उद्योगों द्वारा प्रदूषण। यदि अब हम जैसे बेटे मां का इलाज नहीं करवायेगें तो आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी।

‘‘मैं गंगा का बेटा हूं‘‘ कहने वाले उस बेटे को मां हृदयरोग की बीमारी है, दांतों के डॉक्टर से इलाज मत करवाओ। इससे मां और अधिक बीमार होती जा रही है। अपने हजारों करोड़ खर्च किये लेकिन हमारी मां गंगा अधिक बीमार हो गई है। मां गंगा के लिए खर्च करने की जरुरत नहीं है। यह कोविड-19  ने साबित कर दिया कि यदि आप मां गंगा में गंदगी नहीं डालेगें तो मां फिर से आजाद होकर अविरल – निर्मल व पवित्र होकर बहने लगेगी। लेकिन सरकारें गंगा जी पर खर्च किये ही जा रही है।

इन मांगों को पूरा करने के लिए सरकार ने कई बार वादे किए। 20 मार्च को दिल्ली में मंत्री गजेन्द्र शेखावत ने वादा किया कि सत्‍याग्रहियों से जो बातचीत हुई है, उसको तीन -चार दिनों में पूरा करेंगे, लेकिन वे वादें आज तक पूरे नहीं किये जा सके है।

इस बार सत्‍याग्रहियों ने तय किया कि केवल एक-एक व्यक्ति तपस्या पर न बैठे। गंगा के संरक्षण के लिए सभी अनशन करें। शुरूआत में ही पूरे देश में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में लोगों को जुटा कर, लोग क्रमिक अनशन कर रहे है। क्योंकि इस तरह का अनशन होगा तो लोगों में चेतना जगेगी। जिससे जब लोग जानने लगेंगे कि अनशन पर क्यों बैठे है?

संयुक्त राष्ट्र संघ ने भारत सरकार को कहा है कि ‘‘स्वामी निगमानंद जी और स्वामी सानंद जी की तरह किसी और तीसरे व्यक्ति को ऐसा न करना पड़े।‘‘ इसलिए अब दुनिया  में गंगा बचाने की चेतना जगाने का यह उपवास रखा है। इसकी गूंज अब संयुक्त राष्ट्र में भी शुरूआत हो गई है।

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