शहीद दिवस पर ‘मोहन से महात्मा तक’ कार्यक्रम में भारती दीक्षित ने प्रस्तुत की दास्तानगोई
इंदौर 30 जनवरी। गांधीजी उस महान व्यक्तित्व का नाम था, जिनके पास न सत्ता थी, न पद था, न सिंहासन था, लेकिन हौसले इतने बुलंद थे कि उन्होंने लाठी के सहारे पूरी अंग्रेजी सरकार की सत्ता हिला दी थी। गांधी जी ने बचपन में ही अपने अवगुणों को छांटना शुरू कर दिया था। गांधीजी के लिए चरखा सूत काटने का साधन नहीं, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने का एक माध्यम था। गांधी जी के राजनीतिक गुरु गोपाल कृष्ण गोखले थे, जिन्होंने गाँधीजी को पहली सीख दी थी कि यदि भारत को जानना हैं तो पहले भारत के लोगों को समझना जरूरी है। उसके बाद गाँधीजी ने रेल के तीसरे श्रेणी में टिकट लेकर पूरे देश की यात्रा की। उन्हें महसूस हुआ कि भारत की आत्मा गांव में बसती है, और सभी देशवासी, अंग्रेजों के अन्याय का शिकार हैं।
प्रख्यात लेखक, चित्रकार और रंगकर्मी सुश्री भारती दीक्षित ने संस्था सेवा सुरभि द्वारा प्रवर्तित ‘झंडा ऊँचा रहे हमारा’ अभियान के समापन कार्यक्रम में शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शहीद दिवस पर दुआ सभागृह में आयोजित ‘मोहन से महात्मा’ शीर्षक कार्यक्रम में अपने एक घंटे के धाराप्रवाह उद्बोधन में बड़े सधे अंदाज में महात्मा गांधी की संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायी यात्रा को इन शब्दों के साथ दिलचस्प अंदाज में प्रस्तुत किया।
सुश्री दीक्षित ने अपने ,धारा प्रवाह उद्बोधन में ‘मोहन से महात्मा’ तक की संघर्षपूर्ण और प्रेरणादायी जीवन यात्रा को दिलचस्प अंदाज में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि गांधीजी को बचपन में ही स्कूली शिक्षा के दौरान ही नकल करने का मौका मिला, लेकिन उन्होंने इसे नहीं स्वीकारा। यह गाँधी की सत्य और ईमानदारी के प्रति गहरी निष्ठा थी। गांधी जी ने जीवनभर केवल सत्य बोला ही नहीं, बल्कि उसमें जीते भी थे। गांधी जी को सत्याग्रह का पहला पाठ कस्तूरबा ने सिखाया। गांधी जी ने सत्य, अहिंसा, स्वदेशी, शुचिता, और सत्याग्रह के बल पर अंग्रेजों के खिलाफ दांडी यात्रा से लेकर सविनय अवज्ञा आंदोलन, असहयोग आंदोलन आदि चलाए, और एक दिन अंग्रेजों को भारत से जाने के लिए मजबूर कर दिया।
सुश्री भारती दीक्षित ने गांधी जी के बचपन से लेकर दक्षिण अफ्रीका में उनकी पढ़ाई और भारत लौटने के बाद विभिन्न आंदोलनों को कहानियों के माध्यम से अनूठे अंदाज में प्रस्तुत किया जिसे सभी श्रोताओं ने सराहा। सुश्री दीक्षित ने कहा कि गांधी जी एक अच्छे लेखक, पत्रकार और सत्यवादी व्यक्ति थे जो अपने अखबार नवजीवन और यंग इंडिया में ऐसी बातें लिखते थे जो लोगों के दिलों में सीधे उतर जाए। दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों को कुली और वकीलों को कुली बैरिस्टर कहा जाता था। गांधी जी मानते थे कि मुठ्ठी भर अंग्रेज पूरे देश पर राज कर रहे हैं, इसलिए इनका असहयोग करना होगा। चौरा चोरी कांड में हुए हिंसक प्रदर्शन ने गांधी जी को भीतर तक हिला दिया, और उन्होंने उसी वक्त असहयोग आंदोलन रोक
कार्यक्रम का शुभारंभ बापू की प्रतिमा के समक्ष संस्था के संयोजक ओमप्रकाश नरेडा, अभिभाषक अनिल त्रिवेदी, गौतम कोठारी, अरविंद बागड़ी, वीरेन्द्र गोयल आदि द्वारा माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके साथ ही गत 15 जनवरी से जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम एवं इंदौर विकास प्राधिकरण की सहभागिता में संचालित किए जा रहे ‘झंडा ऊँचा रहे हमारा’ अभियान का समापन हो गया।
इस अवसर पर पर्यावरणविद डॉ. एस. एल गर्ग, डॉ. दिलीप वाघेला, अजीत सिंह नारंग, गोविंद सिंघल, गौतम कोठारी, डॉ. सम्यक जैन, रामेश्वरम गुप्ता, पंकज दीक्षित, कमल कलवानी, अमीर इंजीनियर वाला और नीरजा जैन ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन किया प्रख्यात रंगकर्मी संजय पटेल ने। दिया। कार्यक्रम के अंत में 2 मिनट का मौन रख अमर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।


