16 जनवरी को बीज, बिजली और श्रम विधेयकों के विरोध में गाँव-गाँव ‘अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’ मनाने का ऐलान

नईदिल्‍ली, 22 दिसंबर। बीज विधेयक 2025, विद्युत विधेयक 2025,  गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-GRAMG अधिनियम 2025), चार श्रम संहिताओं को रद्द कराने, सभी फसलों के लिए MSP@C2+50 प्रतिशत (गारंटीकृत खरीद सहित) का कानून बनाने और व्यापक कर्ज माफी की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने 16 जनवरी 2026 को देशभर के गाँवों में ‘अखिल भारतीय प्रतिरोध दिवस’ मनाने का ऐलान किया है। इस संबंध में आज आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान संगठनों के नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों को किसान-मजदूर विरोधी करार दिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को भारतीय किसान यूनियन उग्रहां के अध्यक्ष जोगेंदर सिंह उग्रहां, किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष डॉ. सुनीलम, अखिल भारतीय किसान खेत मजदूर सभा के अध्यक्ष सत्यवान, कीर्ति किसान यूनियन के अध्यक्ष रविंदर पटियाला और अखिल भारतीय किसान सभा के वित्त सचिव कृष्ण प्रसाद सिंह ने संबोधित किया।

डॉ. सुनीलम ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार कॉरपोरेट हितों के लिए किसानों और मजदूरों पर हमले कर रही है। उन्होंने कहा कि बीज विधेयक के लागू होने से किसानों का हजारों साल पुराना बीजों पर अधिकार खत्म हो जाएगा और कंपनियां महंगे, बांझ बीज बेचेंगी, जिन्हें दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। वहीं, विद्युत सुधार विधेयक से बिजली सब्सिडी समाप्त होगी और स्मार्ट मीटरों के जरिए किसानों को महंगी बिजली खरीदने को मजबूर किया जाएगा। उनके मुताबिक, इन कदमों से खेती की लागत बढ़ेगी और किसान आत्महत्याओं का खतरा और गहराएगा।

नेताओं ने यह भी कहा कि मांग आधारित मनरेगा व्यवस्था को कमजोर कर केंद्र सरकार अपने हिस्से की वित्तीय जिम्मेदारी घटाकर राज्यों पर बोझ डाल रही है और पंचायत चयन जैसे अधिकार अपने पास रख रही है। आरोप लगाया गया कि महात्मा गांधी के नाम और मनरेगा के जरिए संगठित हुई मजदूर खासतौर पर महिलाओं की ताकत को खत्म करने की मंशा से ये फैसले लिए जा रहे हैं।

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संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को समाप्त कर उसकी जगह ‘विकसित भारत गारंटी ऑफ रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम’ लागू किया गया है। इसके साथ ही शत प्रतिशत एफडीआई की अनुमति देने वाला बीमा विधेयक 2025 और ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (SHANTI) विधेयक 2025’ लाकर निजी और विदेशी पूंजी के लिए रास्ते खोले जा रहे हैं। उनका कहना था कि ये कदम पहले से लागू जन-विरोधी नीतियों मुक्त व्यापार समझौते, बीज व बिजली विधेयक और चार श्रम संहिताओं की ही निरंतरता हैं।

मोर्चा ने स्पष्ट किया कि मजदूर-ग्रामीण मजदूर-किसान एकता ही इन नीतियों का मुकाबला कर सकती है। इसी रणनीति के तहत 16 जनवरी 2026 को गाँव-गाँव महापंचायतें आयोजित कर प्रतिरोध दिवस मनाया जाएगा। संयुक्त किसान मोर्चा ने किसानों और ग्रामीण मजदूरों से आह्वान किया कि बीज विधेयक, विद्युत विधेयक, VB-GRAMG अधिनियम और चार श्रम संहिताओं को रद्द कराने तथा MSP@C2+50 प्रतिशत के कानून और व्यापक कर्ज माफी लागू होने तक संघर्ष तेज किया जाए, ताकि किसान आत्महत्याओं और ग्रामीण-शहरी पलायन पर रोक लग सके।

कार्यक्रमों की रूपरेखा के तहत संयुक्त किसान मोर्चा की राज्य समन्वय समितियाँ 30 दिसंबर 2025 से पहले बैठकें करेंगी। इसके बाद जिला समितियाँ 9 से 15 जनवरी 2026 के बीच गाँव-गाँव पदयात्रा, साइकिल रैलियाँ और घर-घर संपर्क अभियान चलाएँगी। SKM की राष्ट्रीय परिषद की बैठक 11 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में प्रस्तावित है। मोर्चा ने चार श्रम संहिताओं के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों द्वारा प्रस्तावित अखिल भारतीय आम हड़ताल और नरेगा संघर्ष मोर्चा के आंदोलन को भी समर्थन देने की घोषणा की।

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इसके साथ ही संयुक्त किसान मोर्चा  ने राज्यों के संघीय अधिकारों को मजबूत करने, GST अधिनियम में संशोधन कर राज्यों की कराधान शक्तियाँ बहाल करने और विभाज्य कर पूल में राज्यों की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की मांग उठाई। मोर्चा ने ‘डबल इंजन’ सरकारों के तहत लागू कथित दमनकारी पुलिस नीतियों का भी विरोध करने का एलान किया।

उक्‍त जानकारी किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता एड शिवसिंह ने दी।

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