आपातकाल किसी तंत्र नहीं, परिवार हित का निर्णय था : पूर्व सांसद के. सी. त्यागी

आचार्य कृपलानी स्मृति व्याख्यान-2025 का आयेाजन

नई दिल्ली, 11 नवंबर। हिंदी भवन में रविवार को आचार्य कृपलानी स्मृति व्याख्यान-2025 का आयोजन किया गया। व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद श्री के. सी. त्यागी उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष श्री रामबहादुर राय ने की।

पूर्व सांसद के. सी. त्यागी ने ‘आपातकाल में आचार्य जे. बी. कृपलानी’ विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि आपातकाल लगाने वाली सरकार को जयप्रकाश नारायण ने अवैधानिक माना था। यह निर्णय लोकतांत्रिक तंत्र की मजबूरी नहीं, बल्कि एक परिवार के हित साधने का प्रयास था। उन्होंने कहा कि समाजवादी विचारक और गांधीजी के अनुयायी रहे जे. बी. कृपलानी और जयप्रकाश नारायण, दोनों ही लोकतंत्र और स्वतंत्रता के सच्चे प्रहरी थे। त्यागी ने कहा कि “गांधीजी जो कहते थे, नेहरू अक्सर उसका उल्टा करते थे। नेहरू नाम मात्र के गांधीवादी थे, उनके किसी सिद्धांत का पालन उन्होंने नहीं किया।”

त्यागी ने आगे कहा कि कांग्रेस शासनकाल में देश भुखमरी से जूझ रहा था और कृषि उत्पादन ठप्प पड़ने लगे थे। ऐसी परिस्थिति में आपातकाल का लगना लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा झटका था।

कार्यक्रम के अध्यक्षीय संबोधन में रामबहादुर राय ने कहा कि आचार्य कृपलानी ने अपने जीवन के अंतिम दौर में ‘माय टाइम्स’ नाम से संस्मरण लिखवाए, जिनका प्रकाशन कृपलानी मेमोरियल ट्रस्ट ने तीन खंडों में किया है। हालांकि, इन पुस्तकों में आपातकाल के समय उनकी भूमिका का उल्लेख अपेक्षाकृत कम मिलता है। उन्होंने कहा कि “आपातकाल के दौरान यदि किसी ने सत्याग्रह किया और गिरफ्तार हुए, तो वे अकेले आचार्य कृपलानी थे।”

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और भजनों के साथ किया गया। मुख्य अतिथि के. सी. त्यागी का स्वागत ट्रस्टी संदीप जोशी ने किया। कार्यक्रम का संचालन प्रबंध न्यासी अभय प्रताप ने किया, आभार सुरेंद्र कुमार ने व्यक्त किया।

इस अवसर पर आईटीएम यूनिवर्सिटी, ग्वालियर के संस्थापक श्री रमाशंकर सिंह, वरिष्ठ लेखक वीरेंद्र मिश्र, विश्व युवक केंद्र के संचालक उदय शंकर सिंह, संदीप जोशी, महेश भाई, सुदीप साहू, प्रो. डॉ. राजीव रंजन गिरी, राजेश कुमार झा, जितेंद्र नारायण सिंह, जगदीश सिंह (अधिवक्ता), श्यामसुंदर, सुनील कुमार, डॉ. शशिकांत राय, मनीष चंद्र शुक्ला, मनोज राय, प्रभात ओझा, प्रेम प्रकाश, जनार्दन यादव, संजय कुमार, गुंजन कुमार, ब्रजेश झा, सुष्मिता सिंह, वंदना झा और सुभाष गौतम समेत अनेक बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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