खादी को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प : चरखा संघ के शताब्दी वर्ष पर सर्वसम्मति प्रस्ताव पारित

अखिल भारतीय चरखा संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय परिचर्चा संपन्न

वर्धा, 17 अक्टूबर । खादी मिशन सेवा ट्रस्ट एवं मुदित शिक्षा संस्था, वर्धा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय परिचर्चा (15 से 17 अक्टूबर 2025) “अखिल भारतीय चरखा संघ के शताब्दी वर्ष” के उपलक्ष्य में सफलता पूर्वक संपन्न हुई।

इस परिचर्चा में देशभर से लगभग 150 खादी संस्थाओं के प्रतिनिधि, गांधीवादी कार्यकर्ता, शिक्षाविद्, खादी-प्रेमी एवं विद्यार्थी शामिल हुए। तीन दिनों तक चली चर्चाओं में खादी के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व पर गहन विमर्श हुआ।

परिचर्चा के दूसरे दिन डॉ. महेश कुमार सिंह, एमगिरि, वर्धा ने कहा कि “खादी का नाम लेते ही हमें गांधी और स्वतंत्रता संग्राम की याद आती है। खादी केवल वस्त्र नहीं, यह आत्मनिर्भरता और सत्याग्रह की जीवंत प्रतीक है।”

इसी सत्र में श्री जवाहरलाल सेठिया, राष्ट्रीय सह संयोजक, खादी मिशन एवं पूर्व सचिव ने “खादी पर जीएसटी का प्रभाव” विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि कर नीति में पारदर्शिता और सहूलियत खादी उद्योग के विकास के लिए अनिवार्य है।

पूर्व निदेशक, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, भारत सरकार, श्री अशोक कुमार शरण ने “खादी का पुनर्मूल्यांकन” विषय पर कहा कि बदलते समय में खादी को केवल परिधान नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक पुनरुत्थान के माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए।

मगन संग्रहालय समिति, वर्धा के श्री मुकेश लुतडे ने “प्राकृतिक रंग और खादी” विषय पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि “खादी केवल कपड़ा नहीं, बल्कि सतत जीवनशैली का दर्शन है।”

समापन दिवस पर प्रो. राम प्रकाश द्विवेदी, पूर्व निदेशक, गांधी अध्ययन पीठ, काशी विद्यापीठ, वाराणसी ने “गांधी के ग्राम स्वराज में चरखे का स्थान” विषय पर कहा कि “चरखा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और स्वाभिमान का प्रतीक था।”

See also  राष्ट्रीय गांधी विचार युवा एवं विश्वविद्यालय शिविर : गांधी दर्शन, पर्यावरण और मानवता पर गहन विमर्श

जयपुर से आए श्री भगवती प्रसाद पारीक ने “खादी: आज़ादी की विरासत से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक” विषय पर कहा कि अब समय है कि खादी के विचार को विश्व पटल पर भारत की पहचान के रूप में प्रस्तुत किया जाए।

प्रो. नृपेंद्र प्रसाद मोदी, पूर्व अध्यक्ष, गांधी एवं शांति अध्ययन विभाग, महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा ने “चरखा, खादी एवं गांधी” विषय पर कहा कि चरखा आज भी आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला बन सकता है।

समापन सत्र में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित किया गया कि “जन-खादी विचार” को जन-जन तक पहुँचाने के लिए वर्षभर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे, जिनमें अकादमिक जगत, खादी संस्थान और सर्वोदय संगठनों का संयुक्त सहयोग रहेगा। साथ ही, आगामी बैठक पवनार में 15–17 नवंबर 2025 को आयोजित करने का निर्णय लिया गया।

मुदित बाल विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती अपर्णा सिंह ने तकनीकी संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। परिचर्चा का संचालन प्रो. पुष्पेंद्र दुबे, मैनेजिंग ट्रस्टी, खादी मिशन सेवा ट्रस्ट ने किया तथा कार्यक्रम का समापन डॉ. भारती देवी (दिल्ली विश्वविद्यालय) के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। परिचर्चा के समन्‍वयन में मुदित शिक्षा संस्था के निदेशक डॉ. पंकज कुमार सिंह की विशेष भूमिका रही।  

Table of Contents

अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस : क्या भारत की अपेक्षा अमेरिकी जनता अधिक खुश है ?

भूटान की “सकल राष्ट्रीय प्रसन्नता” की अवधारणा से प्रेरित अंतरराष्ट्रीय प्रसन्नता दिवस (20 मार्च) आज विकास की नई परिभाषा प्रस्तुत करता है। आय से आगे बढ़कर जीवन की गुणवत्ता, सामाजिक संबंध और मानसिक संतोष को महत्व देने वाली यह सोच,

Read More »

विनोबा परंपरा के अग्रणी कर्मयोगी बालविजयजी के निधन से खादी आंदोलन को अपूरणीय क्षति, गांधी संस्थाओं ने दी श्रद्धांजलि

वर्धा, 19 मार्च। प्रख्यात गांधीवादी चिंतक, खादी सेवक और विनोबा परंपरा के अग्रणी कर्मयोगी आचार्य श्री बालविजयजी (100 वर्ष) के निधन पर देशभर की गांधीवादी संस्थाओं और प्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं। सर्वोदय आंदोलन

Read More »

सामयिक : अपने-अपने ‘एपस्टीन’

इस साल की शुरुआत में उछली ‘ज्येफ्री एपस्टीन फाइल्स’ ने साबित कर दिया है कि असीमत पूंजी इंसान की अंतर्निहित गंदगी को कई-कई गुना बढ़ाती, उजागर करती है। कहा जा रहा है कि खाड़ी देशों में जारी उठा-पटक और दुनिया

Read More »