Sarvodaya Press Service

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‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा : ऐतिहासिक कालाकांकर में पदयात्रियों ने जलाई कॉर्पोरेट सामानों की होली

प्रतापगढ़, 13 अक्टूबर। सर्व सेवा संघ की नेतृत्व में जारी ‘एक कदम गांधी के साथ’ पदयात्रा आज 12वें दिन सुबह मानिकपुर के ज्वाला देवी धर्मशाला से निकलकर आलापुर पहुंची, जहाँ डॉ. अनुज सोनकर के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने पदयात्रियों का स्वागत किया। इसके बाद पदयात्रा उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित ऐतिहासिक कालाकांकर पहुँची। कालाकांकर का इतिहास गौरवशाली रहा है लेकिन विशेष रूप से यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में अपनी भूमिका के लिए जाना जाता है। यहां के राजपरिवार ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ सक्रिय योगदान दिया, और यह क्षेत्र महात्मा गांधी के आंदोलनों का महत्वपूर्ण केंद्र बना।

बापू 14 नवम्बर 1929 को कालाकांकर नरेश राजा अवधेश सिंह के बुलावे पर यहाँ पहुँचे जहाँ उन्होंने ‘गांधी चबूतरा’ पर विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। यह घटना स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का प्रतीक बनी, जिसमें ब्रिटिश कपड़ों का बहिष्कार कर स्वदेशी आंदोलन की लहर चल पड़ी।

असहयोग आंदोलन के दौरान कालाकांकर और आसपास के गांवों में किसानों ने न्याय के लिए ब्रिटिश अदालतों का बहिष्कार कर दिया और “अपना पंचायत, अपनी अदालत” की राह अपनाई। यह कदम असहयोग आंदोलन का एक सशक्त कदम था।

इसके बाद प्रतापगढ़ ज़िले में कई जगहों पर सत्याग्रह शिविर लगे, जहाँ स्वयंसेवकों को सिखाया जाता था कि जेल जाने से न डरें, ब्रिटिश अधिकारी के सामने झुकना नहीं है, खादी पहनना और चरखा चलाना राष्ट्रधर्म है। कई मौकों पर ब्रिटिश प्रशासन ने इन सभाओं को तोड़ने की कोशिश की, पर कालाकाकर जैसे गाँवों के नौजवानों ने डंडे खाने के बाद भी सभा नहीं छोड़ी।

पदयात्रियों ने कालाकांकर में उस ऐतिहासिक स्थल पर पहुंचकर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की जिसके बाद एक सभा का आयोजन हुआ जिसमें वक्ता प्रियेश, चंदन पाल (राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्व सेवा संघ), रामधीरज (यात्रा के संयोजक और उत्तर प्रदेश सर्वोदय मंडल अध्यक्ष), एडवोकेट अर्चना, अनुज सोनकर (परियावाँ क्षेत्र पंचायत सदस्य) ने विदेशी सामानों के बहिष्कार के आंदोलन को याद करते हुए कॉर्पोरेट लूट और शोषण के मुद्दे को लोगों के सामने रखा और अमेरिकी और चीन की मुख्य मल्टीनेशनल कंपनियों के उत्पाद की होली जलाई और लोगों से इन कंपनियों के बहिष्कार की अपील की और ग्रामीणों के साथ स्वदेशी आंदोलन को याद करते हुए ये आवाह्न किया कि गांधी के रास्ते से ही कॉर्पोरेट लूट को रोका जा सकता है।वक्ताओं ने साथ ही इस ऐतिहासिक स्थल की दयनीय स्थिति पर भी दुःख व्यक्त किया और बताया जो समाज अपने धरोहरों को सहेज नहीं सकता उसका वर्तमान खंडहर हो जाता है।

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कार्यक्रम में पदयात्री अरविंद अंजुम,रमेश दाने, लता ताई, बेबी वाईकर, माया ढंडे, ईश्वर चंद्र, अनिल, मुस्तफा, किरण, रेणु शामिल हुए। इसके अलावा नंदलाल मास्टर, श्यामधर तिवारी, सतीश मराठा, सरिता बहन, डॉ.  जीतेन नंदी, विद्याधर, जोखन यादव, सिस्टर फ्लोरीन, निधि,अंतर्यामी बरल, जगदीश, राज किशोर तथा सुमंत सुनानी, अनोखेलाल, सतेंद्र सिंह, गौरव पुरोहित, विवेक मिश्रा, सौरभ त्रिपाठी, अलीबा, प्रवीण वर्मा, नीरज राय, नितिन कुमार, राहुल शर्मा, विकास कुमार, ईश्वरचंद्र, अरविंद कुशवाहा एवं महेश भाई, अनिल सिंह, माणिकचंद, आर्यभट्ट महंत, सचिन, विकास, शिराज़ अहमद और स्थानियों समेत 90 से अधिक लोग मौजूद रहे।

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