गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर ‘पहली तारीख’ में कला और कविता का संगम

भोपाल, 1 अक्‍टूबर। गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर ‘पहली तारीख’ का 18वाँ आयोजन हर बार की तरह गांधी भवन, एकता परिषद में हुआ। इस बार का आयोजन कला, कविता और संवाद का अनूठा संगम साबित हुआ।

प्रसिद्ध कलाकार विक्रम नायक की रेखाचित्र प्रदर्शनी ने गांधीजी की दृष्टि से आज के समाज की सोच को दिखाने का प्रयास किया। अपने चित्रों और संवाद “अहिंसा और कला” के माध्यम से उन्होंने यह सवाल उठाया कि किस तरह सोशल मीडिया हमारे विचारों को प्रभावित करता है और हम अपने मौलिक चिंतन से दूर होते जा रहे हैं। दर्शकों ने उनके चित्रों में आज के परिदृश्य और गांधीजी की विचारधारा के बीच गहरी कड़ी को महसूस किया।

इस अवसर पर कवि लोकेश मालती प्रकाश ने अपनी कविताएँ ‘चिट्ठी’, ‘ईश्वर का दुख’, ‘क्या हमें माफ़ कर सकोगी जामलो मकदम’, ‘अकेला नहीं है पेड़’ और कई अन्य रचनाएँ प्रस्तुत कीं। उनकी कविताओं ने श्रोताओं को गहराई से छुआ और समाज तथा मनुष्य की संवेदनाओं पर नए दृष्टिकोण दिए।

‘पहली तारीख’ का यह आयोजन एक बार फिर कलाकारों और कला-प्रेमियों के बीच संवाद और सहभागिता का मंच बना। गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर हुआ यह कार्यक्रम कला, कविता और विचार का यादगार मेल साबित हुआ।

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