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2 अक्टूबर से 26 नवम्बर 2025 तक गांधी पदयात्रा : लोकतंत्र और संविधान बचाने का आह्वान

2 अक्टूबर से 26 नवम्बर 2025 तक गांधी पदयात्रा : लोकतंत्र और संविधान बचाने का आह्वान

वाराणसी, 23 सितम्बर। गांधी विचारों के अध्ययन, शोध, प्रसार और प्रयोग की साधना स्थली रहे राजघाट, वाराणसी से 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन शुरू होकर 26 नवम्बर संविधान दिवस को दिल्ली में समाप्त होने वाली गांधी पदयात्रा एक ऐतिहासिक...

वाराणसी, 23 सितम्बर। गांधी विचारों के अध्ययन, शोध, प्रसार और प्रयोग की साधना स्थली रहे राजघाट, वाराणसी से 2 अक्टूबर गांधी जयंती के दिन शुरू होकर 26 नवम्बर संविधान दिवस को दिल्ली में समाप्त होने वाली गांधी पदयात्रा एक ऐतिहासिक पहल के रूप में सामने आ रही है। इस यात्रा का उद्देश्य न केवल गांधी स्मृति को जीवित करना है, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जनजागरण करना भी है। इस पदयात्रा की शुरुआत उस स्थल से होगी, जिसे सत्ता-प्रशासन ने एक वर्ष से अधिक समय पूर्व अवैधानिक और अनैतिक तरीके से ध्वस्त कर दिया था।

यह पदयात्रा लगभग 1000 किलोमीटर लंबी होगी, जिसमें 56 दिनों तक 110 पड़ाव होंगे। यात्रा तीन राज्यों और 18 जिलों से होकर गुज़रेगी। मार्ग में सेकड़ों स्कूल-कॉलेज, गाँव, कस्बे, बाज़ार और शहर शामिल हैं।

यात्रा वाराणसी के राजघाट से प्रारंभ होकर गाजीपुर, प्रयागराज, रायबरेली, लखनऊ, उन्नाव, कानपुर, औरैया, इटावा, फिरोज़ाबाद, आगरा, मथुरा, फरीदाबाद होते हुए दिल्ली पहुँचेगी।

इस यात्रा का मकसद सिर्फ गांधी स्मृति को जीवित करना ही नहीं, बल्कि लोकतंत्र और भारतीय संविधान की रक्षा के लिए जनजागरण करना भी है। आयोजकों का कहना है कि आज संविधान और लोकतंत्र गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। प्रतिगामी ताकतें स्वाधीन भारत के नागरिकों को फिर से राज सत्ता, धर्म सत्ता और धन सत्ता का गुलाम बनाने की साज़िश में लगी हैं। ऐसे समय में गांधी का विचार और उनकी राह ही जनता को संगठित करने और संवैधानिक ढांचे को संरक्षित करने का साधन बन सकता है।

गांधी विचार परिवार और नागरिकों की भागीदारी

इस यात्रा में गांधी विचार से प्रेरित कार्यकर्ता, विभिन्न संस्थाएँ और गांधी में आस्था रखने वाले नागरिक बड़ी संख्या में शामिल होंगे। यह अभियान “एक कदम गांधी के साथ” के नाम से चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य है कि आम नागरिक अपनी आज़ादी, लोकतंत्र और संविधान की बुनियादी संरचना को बचाने के लिए जागरूक और संगठित हों।

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गांधी स्मारक निधि, राजघाट दिल्ली के अध्यक्ष रामचन्द्र राही ने इस अवसर पर कहा “आजादी पसंद भारत का हर नागरिक अपनी आज़ादी, लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की बुनियादी संरचना को सुरक्षित करने के लिए जागरूक, संगठित और तत्पर हो जाए। यह यात्रा लोकतंत्र और संविधान बचाने की लड़ाई में हमारी सामूहिक भागीदारी का प्रतीक है। मैं आप सभी से अपील करता हूँ कि बड़ी संख्या में इसमें शामिल होकर स्वतंत्र भारत के प्रबुद्ध नागरिक के रूप में अपना कर्तव्य निभाएँ।”

2 अक्टूबर गांधी जयंती से शुरू होकर 26 नवम्बर संविधान दिवस तक चलने वाली यह पदयात्रा महज़ एक आयोजन नहीं, बल्कि गांधी के मूल्यों और लोकतंत्र की आत्मा को पुनर्जीवित करने का राष्ट्रीय प्रयास मानी जा रही है। यह यात्रा न केवल गांधी के विचारों को नए सिरे से जनमानस में स्थापित करेगी, बल्कि संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए व्यापक नागरिक आंदोलन का रूप भी ले सकती है।

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