एक क्लिक में समूची दुनिया से जुड़ने की क्रांति है WWW

योगेश कुमार गोयल

1 अगस्त को मनाया जाने वाला ‘वर्ल्ड वाइड वेब दिवस’ उस तकनीकी क्रांति को स्मरण करने का अवसर है, जिसने दुनिया को एक डिजिटल मंच पर जोड़ दिया। टिम बर्नर्स-ली द्वारा विकसित WWW ने ज्ञान, संवाद और सूचना की दुनिया में ऐसा परिवर्तन लाया, जिसकी कल्पना भी असंभव थी – आज यह आधुनिक जीवन की धड़कन बन चुका है।

World Wide Web Day : 1 August

आज के दौर में जब हर इंसान के हाथ में मोबाइल फोन है और हर सवाल का जवाब बस एक क्लिक की दूरी पर है, तब हम यह सोचने को मजबूर हो जाते हैं कि आखिर यह चमत्कारिक व्यवस्था कैसे अस्तित्व में आई? इंटरनेट तो एक विशाल महासागर है लेकिन उस महासागर तक पहुंचने का द्वार बना ‘World Wide Web’ यानी WWW। बिल्कुल साधारण से प्रतीत होने वाले इन तीन अक्षरों ने मानव जीवन को इस कदर बदल दिया है कि अब पूरी दुनिया में इसका कोई विकल्प ही नहीं बचा। इंटरनेट की यह जादुई खिड़की 1 अगस्त को एक प्रतीक के रूप में याद की जाती है ‘वर्ल्ड वाइड वेब दिवस’ के रूप में, ताकि हम उस विलक्षण मस्तिष्क को याद कर सकें, जिसने यह राह खोली। ‘वर्ल्ड वाइड वेब’ यानी WWW के जनक थे टिम बर्नर्स-ली।

बचपन से ही तकनीक में गहन रुचि रखने वाले टिम बर्नर्स-ली का जन्म 8 जून 1955 को लंदन में हुआ था। 1976 में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के क्वींस कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी करते हुए उन्होंने मात्र 21 वर्ष की उम्र में ही स्वयं का एक कंप्यूटर सेट तैयार कर लिया था। टिम बर्नर्स-ली किसी सामान्य इंजीनियर की तरह केवल सीमित सोच तक नहीं रुके। वर्ष 1980 में जब वे एक निजी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर कार्यरत थे, तभी उन्होंने कंप्यूटर में मौजूद दस्तावेजों और फाइलों को आपस में लिंक करने के लिए ‘इनक्वायर’ नामक एक प्रयोगात्मक प्रोग्राम बनाया। यह उनकी एक छोटी-सी लेकिन दूरदर्शी सोच की नींव थी, जो बाद में पूरे विश्व को एक ही डिजिटल धागे में पिरोने वाली बन गई।

बर्नर्स-ली Tim Berners-Lee की यह सोच सीमाओं में सिमटी हुई नहीं थी बल्कि वे एक ऐसे वैश्विक सूचना तंत्र की कल्पना कर रहे थे, जो समस्त कंप्यूटरों को आपस में जोड़ सके और वह लोगों के लिए सूचनाओं का एक व्यापक, सहज और सुलभ मंच बन जाए। इसी सपने को साकार करते हुए उन्होंने 1989 में ‘वर्ल्ड वाइड वेब’ की अवधारणा प्रस्तुत की और वर्ष 1991 में इस प्रणाली को सार्वजनिक रूप से लॉन्च किया गया। यह केवल तकनीकी प्रगति नहीं थी बल्कि यह मानव सभ्यता के इतिहास में एक नया मोड़ था, जिसने संचार, शिक्षा, व्यापार, शोध और मनोरंजन की परिभाषा ही बदल दी। यह वही दौर था, जब इंटरनेट केवल टेक्स्ट तक सीमित था लेकिन 1993 के बाद इसमें चित्र, ग्राफिक्स और ऑडियो-वीडियो की सुविधा भी जुड़ने लगी, जिससे इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी और WWW एक वैश्विक जीवनशैली का हिस्सा बन गया।

आज, वर्ल्ड वाइड वेब के बिना जीवन की कल्पना करना भी कठिन है। ऑफिस हो या स्कूल, बैंकिंग हो या अस्पताल, फिल्में देखनी हों या संगीत सुनना हो, किसी नए देश की जानकारी लेनी हो या कहीं की यात्रा करनी हो, प्रत्येक रास्ता WWW से होकर गुजरता है। लेकिन इतना सब होते हुए भी यह कहना गलत नहीं होगा कि इस वेब का उपयोग तभी सार्थक है, जब उपयोगकर्ता को सटीक जानकारी खोजने की कला आती हो क्योंकि यह वेब जितना विशाल है, उतना ही भ्रामक भी हो सकता है, यदि आप नहीं जानते कि जानकारी को ढूंढ़ना कैसे है। यही वह बिंदु है, जहां सर्च इंजन नामक तकनीक हमारी राह आसान करती है। यह विशेष प्रोग्राम एक विशालकाय संग्रह की तरह है, जो इंटरनेट पर मौजूद करोड़ों वेबसाइटों और उनके असंख्य पृष्ठों को स्कैन करके, हमारे सामने संबंधित परिणामों की सूची प्रस्तुत करता है। जब भी कोई उपयोगकर्ता किसी विषय पर जानकारी खोजता है, वह किसी सर्च इंजन, जैसे ‘गूगल’, ‘याहू’, ‘बिंग’ या भारतीय प्लेटफॉर्म ‘खोज’ में कुछ शब्द टाइप करता है और फिर वह सर्च इंजन अपने एल्गोरिद्म्स के जरिये करोड़ों पेजों को खंगालकर कुछ ही सैकेंड में उपयोगकर्ता के सामने सबसे प्रासंगिक जानकारी प्रस्तुत कर देता है।

सर्च प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए उपयोगकर्ता विशेष चिन्हों का भी प्रयोग कर सकते हैं। उदाहरणस्वरूप यदि किसी विषय में दो या अधिक नामों को एक साथ खोजना हो तो उनके बीच ‘+’ चिन्ह का प्रयोग कर सकते हैं। जैसे मोदी+शाह टाइप करने से वह पृष्ठ प्राथमिकता में सामने आएंगे, जिनमें दोनों नाम एक साथ होंगे। इसी प्रकार ‘-’ का उपयोग उन शब्दों को हटाने के लिए किया जा सकता है, जिनसे आप परिणामों को फिल्टर करना चाहते हैं। यह केवल तकनीकी जानकारी नहीं बल्कि डिजिटल युग में आत्मनिर्भर बनने का एक आवश्यक कौशल है। वर्ल्ड वाइड वेब की क्रांति के पीछे टिम बर्नर्स-ली का वह अद्वितीय और साहसिक विचार छिपा है, जिसने मानव जीवन की दिशा ही बदल दी। उन्होंने वह कल्पना साकार की, जिसमें एक व्यक्ति किसी कमरे में बैठकर पूरी दुनिया की जानकारी अपनी स्क्रीन पर देख सकता है। यह केवल तकनीकी खोज नहीं थी बल्कि संचार की स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति और ज्ञान की सार्वभौमिक पहुंच का एक शक्तिशाली माध्यम बन गई।

वर्ल्ड वाइड वेब ने न केवल तमाम सीमाओं को मिटा दिया बल्कि सूचनाओं को मुक्त किया और एक वैश्विक समाज की नींव रखी, जिसे हम आज ‘डिजिटल ग्राम’ के रूप में जानते हैं। अब हर वर्ष जब हम 1 अगस्त को वर्ल्ड वाइड वेब दिवस मनाते हैं तो यह केवल एक तिथि नहीं होती बल्कि उस तकनीकी क्रांति को नमन करने का अवसर होता है, जिसने मानव सभ्यता को नई रफ्तार दी। टिम बर्नर्स-ली का यह योगदान न केवल तकनीक के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है बल्कि यह भविष्य की तमाम तकनीकी क्रांतियों का मार्ग प्रशस्त करने वाली प्रेरणा भी है। वर्ल्ड वाइड वेब आज मानव संवाद, शिक्षा, शोध और लोकतंत्र का सशक्त प्रतीक बन चुका है। यह न केवल तकनीकी इतिहास का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है बल्कि मानव सभ्यता की रफ्तार को नई दिशा देने वाली वह लौ है, जो आगे भी अनगिनत तकनीकी क्रांतियों का मार्ग प्रशस्त करती रहेगी।

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