तिरुवनंतपुरम के निकट नेय्याटिंकारा में होगा सम्मान समारोह
तिरुवनंतपुरम, 5 जुलाई। वरिष्ठ गांधीवादी विचारक, लेखक एवं केंद्रीय गांधी स्मारक निधि के अध्यक्ष श्री रामचंद्र राही को दूसरे ‘पी. गोपीनाथन नायर पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। इस पुरस्कार के अंतर्गत ₹50,000 की नकद राशि, प्रशस्ति पट्ट और सम्मान-पत्र प्रदान किया जाएगा। यह घोषणा गांधी मित्र मंडल के अध्यक्ष एडवोकेट बी. जयचंद्रन नायर ने की।
पुरस्कार चयन समिति में डॉ. एन. राधाकृष्णन, श्रीमती सरस्वती अम्मा गोपीनाथन नायर, एडवोकेट राजशेखरन नायर, एडवोकेट कट्टकड़ा अनिल और वी. के. मोहन जैसे प्रतिष्ठित सदस्यों को शामिल किया गया था।
श्री राही को यह सम्मान महात्मा गांधी के विचारों और मूल्यों के प्रचार-प्रसार, रचनात्मक कार्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, तथा अपने जीवन को गांधीवादी दर्शन के अनुसार जीने के लिए दिया जा रहा है। वह दशकों से गांधीवादी संस्थाओं, आंदोलनों और विचारधारात्मक विमर्शों में सक्रिय रूप से योगदान देते आए हैं।
श्री रामचंद्र राही गांधीवादी आंदोलन के एक प्रमुख स्तंभ हैं। वे न केवल केंद्रीय गांधी स्मारक निधि के वर्तमान अध्यक्ष हैं, बल्कि उन्होंने जीवन भर ग्राम स्वराज, सर्वोदय आंदोलन, बुनियादी शिक्षा, खादी व स्वदेशी के प्रचार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राहीजी का जुड़ाव लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से भी रहा है, और उन्होंने आचार्य विनोबा भावे तथा दादा धर्माधिकारी जैसे अग्रणी गांधीवादियों के साथ लंबे समय तक कार्य किया है। देश भर में उन्होंने हजारों युवाओं, स्वयंसेवकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गांधी दर्शन से जोड़ने का कार्य किया है।
उनकी लेखनी भी गांधी चिंतन के क्षेत्र में अत्यंत समृद्ध है — ‘हरिजन सेवक’, ‘गांधी मार्ग’, ‘समाज रचना’, ‘योजना’, ‘युवा संवाद’ ‘सप्रेस’ जैसी प्रकाशनों में उनके लेख नियमित प्रकाशित होते रहे हैं।
यह पुरस्कार समारोह तिरुवनंतपुरम के निकट नेय्याटिंकारा स्थित पी. गोपीनाथन फाउंडेशन परिसर में आयोजित गांधीवादी रचनात्मक कार्यकर्ताओं के एक राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में देश भर के विविध सामाजिक आंदोलनों और संस्थाओं से जुड़े प्रतिनिधि भाग लेंगे।
पी. गोपीनाथन नायर पुरस्कार की स्थापना गांधी मित्र मंडल द्वारा 2023 में की गई थी, जिसका उद्देश्य देश में गांधीवादी विचारधारा पर आधारित सामाजिक कार्यों को मान्यता देना है। यह पुरस्कार पी. गोपीनाथन नायर की स्मृति में दिया जाता है, जिन्होंने केरल में भूदान आंदोलन, गांधी अध्ययन, तथा सर्वोदय कार्यों को गहराई से जिया और फैलाया।


