जन स्वाभिमान यात्रा का मंडला में समापन, विस्थापन व निजीकरण के खिलाफ उठीं आवाजें
मंडला, 1 जुलाई। बालाघाट से 9 जून को प्रारंभ हुई 21 दिवसीय जन स्वाभिमान यात्रा का समापन सोमवार को मंडला जिले के संगम घाट, महाराजपुर में हुआ। इस अवसर पर दो दर्जन से अधिक गांवों से सैकड़ों महिला-पुरुषों ने वर्षा और खेती-किसानी के बीच भी बड़ी संख्या में भागीदारी की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बालाघाट जिला पंचायत सदस्य मंशाराम मंडावी ने कहा कि आदिवासी क्षेत्र अभूतपूर्व संकट से गुजर रहे हैं। यदि अभी संगठित होकर मुकाबला नहीं किया गया तो प्राकृतिक संसाधन तेजी से समाप्त हो जाएंगे।
रुक्मिणी सुरेश्वर (मवई) ने कहा कि आदिवासियों को उनके जंगलों से दूर किया जा रहा है, जबकि वही उनकी आजीविका का आधार हैं। दादुलाल कुङापे (चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति) और मीरा बाई मरावी ने देशभर के आदिवासी संगठनों से विस्थापन के विरुद्ध एकजुट होने की अपील की।
जिला पंचायत सदस्य दल सिंह पन्द्रे ने जल, जंगल, जमीन और जीवन की रक्षा हेतु ठोस नीतिगत कदम उठाने की बात कही। रामनारायण कुङरिया (किसान नेता) ने वन अधिकार कानून को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग करते हुए कहा कि यह कानून ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने के लिए बना था, लेकिन अब बारिश के मौसम में भी आदिवासियों को बेदखल किया जा रहा है।
आलोक शुक्ला (छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन) ने कहा कि सरकारें संसाधनों को कॉरपोरेट के हवाले करने पर तुली हैं। पेसा और वन अधिकार जैसे जनपक्षीय कानूनों को कमजोर किया जा रहा है। वहीं अमूल्य निधि (जन स्वास्थ्य अभियान इंडिया) ने बताया कि सरकारें जिला अस्पतालों का निजीकरण कर रही हैं, जिसका विरोध होना चाहिए।
बिछिया विधायक नारायण सिंह पट्टा ने आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश सरकार 37,000 वर्ग किलोमीटर जंगल निजी हाथों में सौंपना चाहती है। निवास विधायक चेन सिंह बरकड़े ने चुटका परियोजना, बसनिया बांध और राजा दलपत शाह अभ्यारण्य का उल्लेख करते हुए बरगी बांध विस्थापितों की दुर्दशा को याद किया और आगे विस्थापन न करने की मांग उठाई।
पूर्व विधायक डॉ. अशोक मर्सकोले ने कहा कि अब विरोध की रस्म अदायगी से काम नहीं चलेगा, जनप्रतिनिधियों को अपने जमीर को जगाना होगा। राजकुमार सिन्हा (बरगी बांध विस्थापित संघ) ने 30 जून 1855 को हुए संथाल विद्रोह को याद करते हुए आज के दिन को आत्मचिंतन का दिन बताया।

जन संघर्ष मोर्चा के संयोजक और जन स्वाभिमान यात्रा के प्रमुख विवेक पवार ने कहा कि यह यात्रा एक पड़ाव पर पहुंची है, समाप्त नहीं हुई। उन्होंने कहा कि वर्ष के 365 दिनों में से कम से कम एक सप्ताह सभी को अपने बलिदानी पुरखों के विचारों को याद करते हुए जन सरोकारों पर चिंतन में लगाना चाहिए।
समापन के बाद प्रतिभागी कलेक्टर कार्यालय मंडला पहुँचे और महामहिम राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय आदिवासी कल्याण मंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि मंडला, बालाघाट, डिंडौरी जिलों की प्रस्तावित परियोजनाओं से संभावित विस्थापन पर पूर्ण रोक लगाई जाए। बीजाडांडी और नारायणगंज के किसानों को बरगी जलाशय से लिफ्ट सिस्टम के माध्यम से सिंचाई जल तुरंत उपलब्ध कराया जाए।
इसके अलावा ज्ञापन में बरगी जलाशय में घटते मत्स्य उत्पादन पर अध्ययन कर सुधार के उपाय किए जाने, बरगी जलाशय की फ्लोटिंग सोलर प्लांट योजना को रद्द करने, भूकंप संवेदनशील और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में प्रस्तावित चुटका परमाणु परियोजना को रद्द किये जाने की मांग की गई।
इसके साथ ही वन अधिकार कानून 2006 के अंतर्गत व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकारों को मान्यता दी जाए; दावों की निष्पक्ष जांच कर बेदखली रोकी जाए। बालाघाट जिले के बैहर और बिरसा विकासखंड के 55 वन खंडों को डि-नोटिफाई किया जाए, जिन्हें रिजर्व फॉरेस्ट घोषित किया जा रहा है। परसवाड़ा विकासखंड में लौगूर जंगल की 250 हेक्टेयर भूमि का खनिज आबंटन रद्द किया जाए। कान्हा नेशनल पार्क के कोर क्षेत्र के छह गांवों को राजस्व ग्राम घोषित करने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। विभिन्न परियोजनाओं से विस्थापित परिवारों की आर्थिक स्थिति का सर्वे कराकर उन्हें पुनर्वास का लाभ प्रदान किया जाए।


