पुलिस का मानवीय और सक्रिय दृष्टिकोण घरेलू हिंसा मामलों में निर्णायक भूमिका निभा सकता है : गुरप्रीत कौर देव, विशेष डीजीपी (सीएडी), पंजाब

घरेलू हिंसा पीड़ितों के लिए ‘सांझ राहत’ के तहत पंजाब पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षित करने की पहल

लुधियाना, 29 मई । घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं की पहचान और उन्हें त्वरित सहायता पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए पंजाब राज्‍य के लुधियाना कमिश्नरेट के 70 पुलिस अधिकारियों के लिए आज एक दिवसीय घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को परामर्श और सहायता कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण लॉर्ड महावीर सिविल अस्पताल, लुधियाना में स्थापित सांझ राहत केंद्र की पृष्ठभूमि में हुआ, जिसमें विशेषज्ञों द्वारा घरेलू हिंसा के मुद्दे, पीड़ितों से संवाद, और सहायता तंत्र से जुड़ाव जैसे विषयों पर सत्र लिए गए।

इस प्रशिक्षण कार्यशाला की अध्यक्षता श्रीमती गुरप्रीत कौर देव, आईपीएस, विशेष डीजीपी (सीएडी), पंजाब ने की। इस मौके पर नई शुरूआत संस्‍था के ट्रस्‍टी अमूल्‍य निधि विशेष रूप से उपस्थित थे। इस दौरान लुधियाना के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, विभिन्न थाना क्षेत्रों के एसएचओ, जांच अधिकारी और महिला हेल्प डेस्क पर तैनात महिला पुलिसकर्मी उपस्थित रहीं।

विशेष डीजीपी (सीएडी) पंजाब श्रीमती गुरप्रीत कौर देव ने अपने संबोधन में कहा, “घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं के साथ संवेदनशील व्यवहार, उन्हें कानूनी, सामाजिक व मानसिक सहयोग देना और उन्हें सरकारी-गैरसरकारी सहायता तंत्र से जोड़ना आज की आवश्यकता है। पुलिस का मानवीय और सक्रिय दृष्टिकोण इस दिशा में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।” उन्होंने संरक्षण अधिकारी, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और स्वयंसेवी संगठनों के साथ समन्वय पर विशेष बल दिया।

उल्‍लेखनीय है कि घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं को परामर्श और सहायता कार्यशाला सांझ राहत परियोजना का हिस्सा था, जो एक संयुक्त पहल है पंजाब पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और नागरिक समाज संगठनों की। इस परियोजना का उद्देश्य घरेलू हिंसा से प्रभावित महिलाओं की पहचान कर उन्हें मनो-सामाजिक, कानूनी और पुनर्वास संबंधी सहायता प्रदान करना है।

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इस पहल का संचालन पंजाब पुलिस और मध्‍यप्रदेश के इंदौर स्थित गैर-सरकारी संगठन ‘नई शुरुआत’ के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है। इसके लिए दोनों के बीच 25 अप्रैल 2024 को समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे।

सांझ राहत परियोजना के तहत प्रथम केंद्र एसएएस नगर (मोहाली) के सिविल अस्पताल में प्रारंभ हुआ था, जहां परामर्शदाताओं ने पिछले कुछ महीनों में घरेलू हिंसा से पीडित 157 मामलों में सहायता दी। इसके बाद दूसरा केंद्र 20 मार्च 2025 को लुधियाना के सिविल अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में आरंभ हुआ, जहां अब तक 52 मामलों में सहायता दी जा चुकी है। हाल ही में तीसरा केंद्र 28 मई 2025 को फतेहगढ़ साहिब में शुरू हुआ है।

हर केंद्र पर मनोविज्ञान या सामाजिक कार्य में स्नातकोत्तर दो परामर्शदाता नियुक्त किए गए हैं, जो अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में आने वाली पीड़ित महिलाओं को सहायता और परामर्श प्रदान करते हैं।

इस पहल का उद्देश्य केवल तात्कालिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाना, निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाना और उन्हें हिंसा-मुक्त जीवन की ओर अग्रसर करना है।

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