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गांधी की तपोभूमि कौसानी में शराब दुकान का विरोध तेज़ – पद्मश्री राधा भट्ट ने CM Uttarakhand को लिखा पत्र

राम दत्त त्रिपाठी

उत्तराखंड की शांत और आध्यात्मिक नगरी कौसानी, जो महात्मा गांधी के अनासक्ति आश्रम , लक्ष्मी आश्रम और साहित्यकार सुमित्रानंदन पंत के लिए प्रसिद्ध है, इन दिनों एक विवाद के केंद्र में है।

राज्य सरकार ने हाल ही में यहाँ शराब की दुकान खोलने का लाइसेंस देहरादून के एक व्यवसायी को दिया है, जिसका स्थानीय नागरिकों और गांधीवादी कार्यकर्ताओं ने ज़ोरदार विरोध किया है।

लक्ष्मी आश्रम से जुड़ी वरिष्ठ गांधीवादी कार्यकर्ता और पद्मश्री सम्मानित राधा भट्ट ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर निर्णय वापस लेने की माँग की है। उन्होंने कहा है कि यह निर्णय न केवल गांधीवादी मूल्यों के खिलाफ़ है, बल्कि कौसानी जैसे ग्रामीण और संघर्षशील क्षेत्र में महिलाओं व किशोरियों पर नकारात्मक सामाजिक प्रभाव डाल सकता है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर व सामाजिक कार्यकर्ता अरुण तिवारी का अरुण तिवारी का मानना है कि यह निर्णय गांधी जी की अहिंसा, आत्मसंयम और ग्राम स्वराज की अवधारणा के विपरीत है और इससे क्षेत्र में अराजकता और सामाजिक विघटन बढ़ सकता है।

स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता अब सरकार से लाइसेंस रद्द करने और कौसानी के गांधीवादी चरित्र की रक्षा करने की मांग कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अब लोग सड़क किनारे शराब पीते नज़र आते हैं, लड़खड़ाते हैं और कई बार झगड़े व छेड़खानी जैसी घटनाएँ भी होती हैं। रविवार की रात कुछ युवकों ने अनासक्ति आश्रम में घुसकर गांधी प्रतिमा के पास अभद्र व्यवहार किया और गाली-गलौज कर भाग निकले। आश्रम में ठहरी एक महिला के अनुसार, यह घटना रात करीब आठ बजे हुई। यह स्पष्ट नहीं है कि युवक नशे में थे या नहीं, लेकिन घटना ने स्थानीय लोगों को विचलित कर दिया है।

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व्यापारियों की अलग राय
कौसानी के कुछ व्यापारियों का कहना है कि इससे पर्यटन और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि पहले लोगों को शराब के लिए दूर जाना पड़ता था या ब्लैक में महंगे दामों पर खरीदनी पड़ती थी।

अब स्थानीय नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और गांधीवादी सरकार से लाइसेंस रद्द करने और कौसानी की गांधीवादी पहचान की रक्षा की माँग कर रहे हैं।

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